उज्जैन की नगर पूजा में 26 किलोमीटर की पदयात्रा, 40 मंदिरों में चढ़ेगा भोग
कलेक्टर और एसपी की मौजूदगी में शुरू हुई नगर पूजा

उज्जैन में शारदीय नवरात्रि की महाअष्टमी पर सदियों पुरानी शासकीय नगर पूजा की परंपरा का सोमवार सुबह शुभारंभ हुआ। चौबीस खंभा माता मंदिर में कलेक्टर रोशन कुमार सिंह और एसपी प्रदीप शर्मा की मौजूदगी में महामाया और महालया माता की पूजा-अर्चना तथा मदिरा का भोग अर्पित किया गया। इसके बाद प्रशासनिक दल 26 किलोमीटर लंबी पदयात्रा पर रवाना हुआ। इस दौरान शहर के 40 देवी, भैरव और हनुमान मंदिरों में पूजन किया जाएगा। परंपरा के अनुसार देवी और भैरव मंदिरों में मदिरा की धार अर्पित की जाती है, जबकि हनुमान मंदिरों में ध्वजा, लंगोट और जनेऊ चढ़ाए जाते हैं।
कलेक्टर और एसपी की मौजूदगी में हुआ पूजन
सोमवार सुबह करीब 8 बजे चौबीस खंभा माता मंदिर में महामाया और महालया माता की पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान माता को 16 शृंगार सामग्री, चुनरी, विशेष भोग बलबाकल और मदिरा अर्पित की गई। बलबाकल उबले हुए काले चने और गेहूं से तैयार किया जाता है। पूजन के बाद महाआरती हुई और ढोल-नगाड़ों के साथ शासकीय दल पदयात्रा पर निकला।
इससे पहले रविवार रात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन के मां नगरकोट महारानी मंदिर पहुंचकर दर्शन-पूजन और आरती की थी।
40 मंदिरों में अलग-अलग पूजन परंपराएं
नगर पूजा के दौरान दल निर्धारित मार्ग से चामुंडा माता, भूखी माता, काल भैरव और चंड-मुंड नाशिनी सहित शहर के प्रमुख मंदिरों में पहुंचेगा। देवी मंदिरों में शृंगार सामग्री, बलबाकल, पूड़ी-भजिए, नारियल, हार-फूल और मदिरा अर्पित की जाती है। भैरव मंदिरों में भी पूजन सामग्री और मदिरा का भोग चढ़ता है। हनुमान मंदिरों में ध्वजा, लाल लंगोट और जनेऊ अर्पित करने की परंपरा है।
इस पदयात्रा में लाल ध्वज लेकर चलने वाले सदस्य, ढोल-नगाड़े बजाने वाले, पूजन सामग्री और भोग ले जाने वाले तथा राजस्व अमले के सदस्य शामिल होते हैं। रास्ते में नगरवासी भी दल का स्वागत करते हैं। लोकमान्यता है कि इस नगर पूजा से शहर की अनिष्ट, महामारी और प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा होती है तथा सुख-समृद्धि आती है।
30 बोतल मदिरा और 45 तरह की पूजन सामग्री
नगर पूजा की व्यवस्था राजस्व विभाग की जिम्मेदारी है। पूजा की व्यवस्था देखने वाले पटवारी भगवान सिंह यादव के अनुसार, आबकारी विभाग से 30 बोतल मदिरा निःशुल्क प्राप्त की जाती है। इसके लिए एसडीएम कार्यालय की ओर से पहले पत्र भेजा जाता है।
पूजा के लिए करीब 35 किलो गेहूं और काले चने उबालकर बलबाकल तैयार किया जाता है। पूड़ी और भजिए भी बनाए जाते हैं। करीब 45 तरह की पूजन सामग्री जुटाई जाती है और पूरी पूजा का अनुमानित खर्च लगभग 18 हजार रुपये है। व्यवस्था की निगरानी पटवारी, कोटवार और कस्बा पटेल करते हैं।
हरसिद्धि मंदिर में भी होगा शासकीय पूजन
चौबीस खंभा मंदिर में पूजा के बाद दोपहर करीब 12 बजे हरसिद्धि माता मंदिर में जिला प्रशासन की ओर से शासकीय पूजन किया जाता है। इस दौरान माता हरसिद्धि को शृंगार सामग्री अर्पित की जाती है। महाअष्टमी पर उज्जैन के घरों में भी कुलदेवी की विशेष पूजा की जाती है।
नगर पूजा का समापन रात करीब 8 बजे अंकपात क्षेत्र स्थित गढ़कालिका माता मंदिर में पूजन के बाद समीप के हांडी फोड़ भैरव मंदिर में मिट्टी की हांडी फोड़कर किया जाएगा।



