किस शास्त्र में लिखा है रावण दहन ? उज्जैन में महेश पुजारी की चुनौती से गरमाया मामला
चार समितियों को नोटिस

धर्मनगरी उज्जैन में दशहरे से पहले रावण दहन की परंपरा को लेकर नई बहस छिड़ गई है। महाकाल मंदिर से जुड़े पुजारी महेश पुजारी ने दशकों से चली आ रही इस परंपरा के शास्त्रीय आधार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने शहर में रावण दहन कराने वाली चार प्रमुख समितियों को नोटिस भेजकर इस परंपरा का धार्मिक आधार स्पष्ट करने को कहा है। साथ ही उन्होंने इस विषय पर शास्त्रार्थ की चुनौती देते हुए रावण दहन की प्रथा बंद करने की मांग उठाई है।
रामायण में वध का वर्णन, पुतला दहन पर सवाल
महेश पुजारी का कहना है कि वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में भगवान श्रीराम द्वारा रावण वध का वर्णन मिलता है, लेकिन रावण का पुतला बनाकर जलाने की परंपरा का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता। उनका तर्क है कि धार्मिक परंपराओं के औचित्य पर शास्त्रों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए। इसी सवाल को लेकर उन्होंने दशहरा आयोजकों को खुली चुनौती दी है।
चार दशहरा समितियों को भेजे नोटिस
महेश पुजारी ने लाला ओम अमरनाथ खत्री दशहरा उत्सव समिति, कार्तिक मेला दशहरा उत्सव समिति, सिद्धवट दशहरा उत्सव समिति और शास्त्रीनगर दशहरा उत्सव समिति को नोटिस भेजे हैं। नोटिस के जरिए आयोजकों से रावण दहन की परंपरा के समर्थन में शास्त्रीय आधार बताने को कहा गया है। साथ ही निर्धारित समय में जवाब देने की मांग की गई है। इस मामले में समितियों की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर नजर रहेगी।
परंपरा और धार्मिक मान्यताओं पर बहस
देश के कई हिस्सों में दशहरे पर रावण दहन को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। ऐसे में उज्जैन में उठे इस सवाल ने धार्मिक परंपरा, लोकमान्यता और शास्त्रीय व्याख्या के बीच बहस को सामने ला दिया है। महेश पुजारी की मांग और शास्त्रार्थ की चुनौती के बाद अब आयोजक समितियों के जवाब पर सबकी नजर रहेगी।



