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सिंहस्थ-2028 के कामों पर सख्ती, इंजीनियरों की मौके पर मौजूदगी होगी अनिवार्य

विद्यार्थियों की टीम रोजाना जांचेगी प्रगति, 31 दिसंबर तक 60 से अधिक कार्य पूरे करने का लक्ष्य

लेखक: कपिल माखीजा, जनशक्ति उजालास्थान: उज्जैन, मध्य प्रदेश4 मिनट पढ़ें
सिंहस्थ-2028 के निर्माण कार्यों की समीक्षा बैठक में अधिकारियों के साथ संभागायुक्त आशीष सिंह और कलेक्टर रौशन कुमार सिंह।
सिंहस्थ-2028 के निर्माण कार्यों की समीक्षा बैठक में अधिकारियों के साथ संभागायुक्त आशीष सिंह और कलेक्टर रौशन कुमार सिंह।
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सिंहस्थ-2028 की तैयारियों में निर्माण कार्यों को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के लिए प्रशासन ने निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। निर्माण एजेंसियों के सभी सहायक यंत्रियों और उपयंत्रियों को कार्यस्थलों पर मौजूद रहकर नियमित निरीक्षण करना होगा। वहीं, इंजीनियरिंग कॉलेज के विद्यार्थियों की टीम प्रतिदिन निर्माण स्थलों पर पहुंचकर काम की प्रगति का आकलन करेगी और सीधे सिंहस्थ कार्यालय को रिपोर्ट देगी। संभागायुक्त आशीष सिंह ने गुरुवार, 29 अक्टूबर को सिंहस्थ निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि काम की गति और गुणवत्ता पर लगातार नजर रखी जाए।

निर्माण स्थलों पर इंजीनियरों की तैनाती जरूरी

समीक्षा बैठक में संभागायुक्त ने कहा कि निर्माण एजेंसियों के सहायक यंत्री और उपयंत्री मौके पर रहकर कार्यों का निरंतर निरीक्षण करें। सिंहस्थ के लिए पदस्थ किए गए इंजीनियरों को संबंधित जिलों से तत्काल कार्यमुक्त कराने और उनकी जॉइनिंग सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी अपर मेला अधिकारी को सौंपी गई है।

बैठक में कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, स्मार्ट सिटी की सीईओ नेहा जैन, नगर निगम के अपर आयुक्त संतोष टैगोर, अपर मेला अधिकारी ओमप्रकाश सनोडिया सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

विद्यार्थियों की टीम सीधे सिंहस्थ कार्यालय को देगी रिपोर्ट

निर्माण कार्यों की वास्तविक प्रगति जानने के लिए इंजीनियरिंग कॉलेज के विद्यार्थियों की टीम गठित की गई है। प्रत्येक निर्माण स्थल पर चार-चार विद्यार्थी नियमित रूप से पहुंचेंगे और प्रतिदिन हुए काम का निरीक्षण करेंगे। टीम अपनी रिपोर्ट सीधे सिंहस्थ कार्यालय को सौंपेगी। यदि निर्माण कार्यों की निगरानी के लिए जिम्मेदार इंजीनियर मौके पर नहीं पहुंचते हैं, तो इसकी सूचना भी सिंहस्थ कार्यालय को दी जाएगी।

दिसंबर तक 60 से अधिक कार्य पूरे करने का लक्ष्य

बैठक में विभिन्न विभागों ने जानकारी दी कि 31 दिसंबर 2026 तक 60 से अधिक निर्माण कार्य पूरे करने का लक्ष्य है। इनमें पुलिस आवास, थाने और बैरक, विद्युत उपकेंद्र, अस्पताल, सड़कें, पुल, सुविधा केंद्र, प्रकाश व्यवस्था तथा सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।

पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन के अंतर्गत विभिन्न स्थानों पर पुलिसकर्मियों के आवास, बैरक, नए थाने और अन्य सुविधाओं का निर्माण किया जा रहा है। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के माध्यम से 33/11 केवी के विद्युत उपकेंद्र विकसित किए जा रहे हैं। भैरवगढ़ औषधालय में छह बिस्तरों वाले अस्पताल की स्थापना और वीर दुर्गादास की छतरी के संरक्षण एवं जीर्णोद्धार के कार्य भी परियोजनाओं में शामिल हैं।

सड़क, पुल और संपर्क मार्गों का होगा विकास

लोक निर्माण विभाग और संबंधित एजेंसियों की प्रमुख परियोजनाओं में रणजीत हनुमान-मोजामखेड़ी तथा काल भैरव-मोजामखेड़ी मार्ग पर चार लेन सड़क निर्माण, सदावल में चार हेलीपैड और मंगलनाथ से चक कमेड़ तक सड़क निर्माण शामिल हैं। उज्जैन-बड़नगर मार्ग के शेष हिस्से का निर्माण तथा उज्जैन-नागदा और इंदौर-उज्जैन रेलखंड पर रेलवे ओवरब्रिज की परियोजनाएं भी योजना का हिस्सा हैं।

काल भैरव मंदिर से गढ़कालिका मंदिर तक सड़क निर्माण, क्षिप्रा नदी पर ओखलेश्वर पुल के समानांतर नया पुल तथा चिंतामण गणेश, नईखेड़ी और पंवासा रेलवे स्टेशनों तक पहुंच मार्ग विकसित करने के कार्य भी प्रस्तावित हैं।

सुविधा केंद्रों और शहरी सड़कों पर भी जोर

ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग पंचक्रोशी यात्रा मार्ग के पड़ावों और उपपड़ावों पर सुविधा केंद्रों के साथ सात हाईमास्ट लाइट और परिसर प्रकाश व्यवस्था विकसित करेगा। उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा भर्तृहरि गुफा से ऋणमुक्तेश्वर, प्रशांति धाम चौक से शनि मंदिर और गढ़कालिका मंदिर से पीर मत्स्येंद्रनाथ तक सड़क निर्माण के कार्य किए जाएंगे।

नगर निगम की परियोजनाओं में प्रमुख सड़कों का चौड़ीकरण, सीमेंट कंक्रीट सड़कें, केंद्रीय प्रकाश व्यवस्था, डिवाइडर निर्माण और पवासा में विस्थापित लोगों के लिए मूलभूत सुविधाओं का विकास शामिल है। स्मार्ट सिटी के अंतर्गत महाकाल पार्किंग से चौबीस खंभा मार्ग, महाकाल पार्किंग से अहिल्याबाई मार्ग और झालरिया मठ से रामघाट तक सड़क विकास के कार्य किए जा रहे हैं।

विरासत स्थलों और संग्रहालयों का भी होगा उन्नयन

सिंहस्थ से जुड़ी विकास योजनाओं में कोठी पैलेस का वीर भारत संग्रहालय के रूप में संरक्षण एवं जीर्णोद्धार भी शामिल है। इसके अलावा विक्रम कीर्ति मंदिर और विक्रम विश्वविद्यालय स्थित सिंधिया प्राच्य शोध संस्थान के संग्रहालयों के उन्नयन, आंतरिक साज-सज्जा तथा प्रदर्शनियों से जुड़े कार्य प्रस्तावित हैं।

निर्माण स्थलों पर इंजीनियरों की नियमित मौजूदगी और विद्यार्थियों के माध्यम से दैनिक प्रगति की रिपोर्टिंग की व्यवस्था से कार्यों की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है। अब संबंधित विभागों के सामने निर्धारित समयसीमा में निर्माण कार्य पूरे करने की जिम्मेदारी रहेगी।

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