दशहरे पर राजसी रंग में दिखे ज्योतिरादित्य सिंधिया, ग्वालियर में निभाई 300 साल पुरानी परंपरा
पुत्र महाआर्यमन के साथ देवघर में की पूजा-अर्चना

ग्वालियर में मंगलवार, 20 अक्टूबर को विजयदशमी के अवसर पर सिंधिया राजपरिवार की करीब 300 साल पुरानी परंपरा शाही अंदाज में निभाई गई। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने पुत्र महाआर्यमन सिंधिया के साथ पारंपरिक शाही वेशभूषा में गोरखी स्थित देवघर पहुंचे थे। यहां पूजा-अर्चना के बाद वे शाही सवारी के साथ दशहरा मैदान पहुंचे, जहां उन्होंने परंपरा के अनुसार शमी पूजन किया। इस आयोजन को देखने के लिए बड़ी संख्या में नगरवासी मौजूद रहे।
देवघर में पूजा के बाद निकली शाही सवारी
विजयदशमी पर सिंधिया राजपरिवार की धार्मिक परंपरा के तहत देवघर में विशेष पूजन किया गया। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ उनके पुत्र महाआर्यमन सिंधिया भी मौजूद रहे। पूजा-अर्चना के बाद दोनों शाही सवारी के साथ दशहरा मैदान पहुंचे। वहां मौजूद लोगों ने सिंधिया का अभिवादन किया।
तलवार से शमी वृक्ष को स्पर्श कर निभाई रस्म
दशहरा मैदान में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी तलवार से शमी वृक्ष की डाल को स्पर्श किया। इसके साथ ही पारंपरिक शमी पूजन संपन्न हुआ। इसके बाद शमी की पत्तियां लेने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। मान्यता है कि विजयदशमी पर शमी की पत्तियों को सोने का प्रतीक मानकर घर ले जाया जाता है। इन्हें विजय और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।
महादजी सिंधिया के समय से चली आ रही परंपरा
सिंधिया राजपरिवार में शमी पूजन की परंपरा करीब 300 साल पुरानी बताई जाती है। यह परंपरा महादजी सिंधिया के समय से चली आ रही है और इसे विजय व समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। पूजन के बाद केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भारतीय परंपराओं का उल्लेख करते हुए सभी को विजयदशमी की शुभकामनाएं दीं।



