36 मौतों के बाद हटाए गए अधिकारी को बनाया रायसेन कलेक्टर, जीतू पटवारी ने उठाए सवाल
रोहित सिसोनिया की नियुक्ति पर कांग्रेस की आपत्ति

मध्य प्रदेश में आईएएस अधिकारियों के बड़े प्रशासनिक फेरबदल के बाद इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों का मामला फिर चर्चा में है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भागीरथपुरा मामले के बाद इंदौर नगर निगम से हटाए गए आईएएस अधिकारी रोहित सिसोनिया को रायसेन का कलेक्टर बनाए जाने पर सवाल उठाए हैं। राज्य सरकार ने 13 अक्टूबर की रात जारी प्रशासनिक फेरबदल में सिसोनिया को यह जिम्मेदारी सौंपी।
भागीरथपुरा मामले से जुड़ा है विवाद
इंदौर के भागीरथपुरा में दिसंबर 2025 में दूषित पेयजल की आपूर्ति के बाद बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े थे और मौतें हुई थीं। उस समय रोहित सिसोनिया इंदौर नगर निगम में अपर आयुक्त के पद पर पदस्थ थे। घटना के बाद उन्हें निलंबित किया गया था और बाद में इंदौर से हटाकर मंत्रालय में पदस्थ किया गया। अब रायसेन कलेक्टर के रूप में उनकी नियुक्ति को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं।
जांच और जवाबदेही पर पटवारी का सवाल
पटवारी ने कहा कि भागीरथपुरा त्रासदी में 36 लोगों की मौत के बाद हटाए गए अधिकारी को जिले का कलेक्टर बनाया गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सवाल किया कि प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने और जिम्मेदारी तय करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने जांच आयोग की रिपोर्ट पर कार्रवाई का विवरण सामने रखने की मांग भी की है।
23 आईएएस अधिकारियों के हुए तबादले
राज्य सरकार के प्रशासनिक फेरबदल में कुल 23 आईएएस अधिकारियों के तबादले किए गए, जिनमें 11 जिलों के कलेक्टर भी शामिल हैं। इसी सूची में रोहित सिसोनिया को रायसेन की जिम्मेदारी दी गई। उनकी नियुक्ति पर उठे सवालों के बीच अब भागीरथपुरा मामले में जांच के निष्कर्षों और सरकार की कार्रवाई को लेकर कांग्रेस ने जवाब मांगा है।



