नवंबर में ठंड की रफ्तार रहेगी धीमी, इंदौर संभाग में बादल और बारिश के आसार
मौसम के बदले मिजाज से बढ़ेगा तापमान का उतार-चढ़ाव

नवंबर की शुरुआत इंदौर और आसपास के जिलों में सर्द मौसम के बजाय बादलों, हल्की बारिश और तेज हवाओं के बीच होने के आसार हैं। मौसम के मौजूदा रुख को देखते हुए इस बार नवंबर में कड़ाके की ठंड का असर अपेक्षाकृत कम रहने का अनुमान है। अलनीनो के प्रभाव को भी इसकी एक वजह माना जा रहा है। महीने के पहले सप्ताह में इंदौर सहित संभाग के अधिकांश जिलों में आसमान पर बादलों का डेरा रह सकता है। कुछ स्थानों पर वर्षा की संभावना भी जताई गई है।
पांच दिन तक तापमान में गिरावट
मौसम में आए बदलाव का असर दिन के तापमान पर साफ दिखाई दे रहा है। इंदौर संभाग के अधिकांश जिलों में अधिकतम तापमान में तीन से पांच डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। बादलों की मौजूदगी के चलते अगले पांच दिनों तक दिन का तापमान सामान्य से नीचे बने रहने की संभावना है। हालांकि, इसके बाद आसमान साफ होने पर तापमान में दोबारा बढ़ोतरी हो सकती है।
दिन में कम रहेगी गर्मी, रात का तापमान सामान्य
शुक्रवार को इंदौर में दिनभर बादल छाए रहे। सुबह के समय हल्की ठंडक महसूस हुई। मौसम विज्ञानियों के अनुसार शनिवार को भी बादलों का प्रभाव बना रहने की संभावना है। इसके चलते दिन का तापमान सामान्य से कम रह सकता है, जबकि रात के तापमान में विशेष गिरावट के आसार नहीं हैं। रात का पारा सामान्य के आसपास बने रहने का अनुमान है।
हवाओं ने बदला मौसम का रुख
शहर में इन दिनों हल्की ठंडक के साथ तेज हवाओं का असर भी महसूस किया जा रहा है। अर्नब तूफान के प्रभाव से चल रही हवाओं के कारण तापमान में गिरावट आई है। मौसम का यह बदला हुआ रुख नवंबर की शुरुआत में भी जारी रह सकता है। ऐसे में फिलहाल ठंड बढ़ने के बजाय मौसम में बादलों और तापमान के उतार-चढ़ाव का प्रभाव अधिक दिखाई देगा।
कई मौसमी प्रणालियां सक्रिय
मौसम विज्ञानियों के मुताबिक, क्षेत्र में बादल छाए रहने के पीछे एक साथ कई मौसमी प्रणालियों की सक्रियता है। उत्तर पंजाब के ऊपर पश्चिमी विक्षोभ चक्रवाती परिसंचरण के रूप में मौजूद है। इसके अलावा उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश से उत्तर छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्यप्रदेश में बने कम दबाव के क्षेत्र तक द्रोणिका फैली हुई है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दक्षिणी गुजरात के ऊपर भी ऊपरी हवा के चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हैं। वहीं, पूर्व-मध्य अरब सागर से महाराष्ट्र तट, कोंकण-गोवा, विदर्भ और उत्तर छत्तीसगढ़ होते हुए पूर्वी मध्यप्रदेश के कम दबाव वाले क्षेत्र तक एक अन्य द्रोणिका बनी हुई है। इन मौसमी गतिविधियों के चलते फिलहाल बादलों की आवाजाही और बारिश की संभावनाएं बनी हुई हैं।



