200 एलईडी बल्बों की खरीदी पर 60 लाख खर्च ! नगरीय निकायों की खरीद पर उठे सवाल, जांच के संकेत
तीन साल में 1,134 करोड़ रुपये की खरीदी, कीमतों के अंतर से 250 करोड़ की बचत का दावा

मध्यप्रदेश के नगरीय निकायों में सरकारी सामान की खरीदी के दौरान कीमतों में बड़े अंतर का मामला सामने आया है। खरीद प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों के बीच सरकार ने उच्चस्तरीय जांच कराने की बात कही है। एक मामले में 200 एलईडी बल्बों की खरीदी पर 60 लाख रुपये खर्च होने का दावा किया गया है। इस मामले ने सरकारी खरीद में दरों के निर्धारण और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
तीन साल में 1,134 करोड़ रुपये की खरीदी
जानकारी के मुताबिक, प्रदेश के 374 नगरीय निकायों ने पिछले तीन वर्षों में गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल के माध्यम से करीब 1,134 करोड़ रुपये की सामग्री खरीदी। इसमें कचरा वाहन, स्ट्रीट लाइट, ऑक्टागोनल पोल और अन्य सामान शामिल बताया गया है।
विभागीय प्रस्तुति में दावा किया गया कि यदि औसत कीमतों के आधार पर खरीदी होती, तो करीब 250 करोड़ रुपये की बचत संभव थी। इस अनुमान के बाद विभिन्न नगरीय निकायों में खरीदी गई सामग्री की कीमतों और भुगतान की समीक्षा का मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है।
कीमतों के अंतर और खरीद प्रक्रिया की समीक्षा
नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने कीमतों में अंतर और खरीद प्रक्रिया की समीक्षा की बात कही है। राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के अनुसार, जांच में अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जांच से स्पष्ट होगी खरीदी की स्थिति
अलग-अलग दरों पर खरीद होना अपने आप में भ्रष्टाचार का प्रमाण नहीं है। कीमतों में अंतर के पीछे उत्पाद की गुणवत्ता, तकनीकी विशेषताओं और आपूर्ति की शर्तों जैसे कारण भी हो सकते हैं। इसलिए मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए खरीद आदेशों, सामान की गुणवत्ता, आपूर्ति और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच जरूरी होगी।
जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि खरीदी प्रक्रिया में नियमों का पालन किया गया या कहीं अनियमितता हुई। यदि गड़बड़ी प्रमाणित होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।



