जनशक्ति उजाला
समाचार

MP OBC आरक्षण: 27% की लड़ाई में सरकार की याचिका पर 10 तकनीकी आपत्तियां, तीन कैविएट भी दाखिल

याचिका की खामियों पर ओबीसी संगठन ने उठाए सवाल, आयोग की अनुशंसाओं से नया कानून बनाने की सलाह

लेखक: कपिल माखीजा, जनशक्ति उजालास्थान: भोपाल, मध्य प्रदेश3 मिनट पढ़ें
प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक चित्र
शेयर करें:

मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद अब सरकार की याचिका में दर्ज तकनीकी खामियों को लेकर चर्चा में है। राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की है। ओबीसी एडवोकेट वेलफेयर एसोसिएशन के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने याचिका में 10 तकनीकी आपत्तियां दर्ज की हैं। इस बीच, मामले में तीन कैविएट दाखिल किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

22 अक्टूबर को दर्ज की गईं 10 आपत्तियां

एसोसिएशन के मुताबिक, सरकार की याचिका डायरी क्रमांक 65767/2026 में सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने 22 अक्टूबर को 10 डिफॉल्ट चिह्नित किए। ये आपत्तियां याचिका, आवेदनों और संलग्न दस्तावेजों की प्रस्तुति से संबंधित हैं। इनमें दस्तावेजों को स्पष्ट और पठनीय रखने तथा कागज के एक तरफ डबल स्पेस में टाइप करने जैसी प्रक्रियागत आवश्यकताएं शामिल हैं।

ओबीसी एडवोकेट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने 26 अक्टूबर को जारी पत्र में कहा कि सरकार की अपील दाखिल होने के बाद से ही तकनीकी आपत्तियां दर्ज हैं। एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि इन कमियों को दूर करने के लिए अब तक प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं।

तीन कैविएट दाखिल, सुनवाई का अवसर देने की पहल

मामले में यूथ फॉर इक्वेलिटी संगठन, सत्यम नंदन और रितु बड़ोले की ओर से कैविएट दाखिल किए जाने की जानकारी दी गई है। कैविएट का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मामले में कोई अंतरिम आदेश पारित करने से पहले संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिले।

याचिका में दर्ज तकनीकी आपत्तियों के निराकरण के साथ अब आगे की न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। हालांकि, रजिस्ट्री की आपत्तियां याचिका के कानूनी गुण-दोष पर अदालत के अंतिम निर्णय का संकेत नहीं हैं।

आयोग की अनुशंसाओं के आधार पर कानून बनाने की सलाह

रामेश्वर सिंह ठाकुर ने राज्य सरकार को हाई कोर्ट के फैसले का स्वतंत्र विधि विशेषज्ञों से अध्ययन कराने की सलाह दी है। उन्होंने पिछड़ा वर्ग आयोग की अनुशंसाओं के आधार पर नया कानून बनाने के विकल्प पर विचार करने की बात भी कही।

एसोसिएशन का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट में अपील करने से ओबीसी आरक्षण का विवाद लंबा खिंच सकता है। संगठन ने सरकार से विधायी और संवैधानिक विकल्पों पर विचार करने की मांग की है। यह एसोसिएशन का पक्ष है; मामले में आगे का निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगा।

हाई कोर्ट ने 27% आरक्षण को असंवैधानिक ठहराया था

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 9 अक्टूबर 2026 को ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण संबंधी प्रावधान को असंवैधानिक ठहराते हुए 14 प्रतिशत आरक्षण लागू रखने के निर्देश दिए थे। अदालत ने रोके गए 13 प्रतिशत पदों को अनारक्षित वर्ग से भरने की प्रक्रिया तीन महीने के भीतर पूरी करने को भी कहा था।

राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। अब याचिका की तकनीकी आपत्तियां दूर होने और सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने के बाद मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को लेकर कानूनी विवाद का अंतिम निर्णय आना बाकी है।

शेयर करें:

संबंधित खबरें

टीआई दिलीप पुरी केस के मामले में राहुल जायसवाल गिरफ्तार, अवैध शराब कारोबार में 30% हिस्सेदारी कबूली

टीआई दिलीप पुरी केस के मामले में राहुल जायसवाल गिरफ्तार, अवैध शराब कारोबार में 30% हिस्सेदारी कबूली

गुजरात तक फैले तस्करी नेटवर्क का खुलासा, पुलिस के सामने कई नाम बताए

कपिल माखीजा, जनशक्ति उजालादेवास, मध्य प्रदेश2 मिनट पढ़ें
किसानों को सीएम की सौगात, धान पंजीयन की तारीख 4 नवंबर तक बढ़ाई; सिवनी में बनेगा फूड पार्क

किसानों को सीएम की सौगात, धान पंजीयन की तारीख 4 नवंबर तक बढ़ाई; सिवनी में बनेगा फूड पार्क

डॉ. मोहन यादव ने बलराम कृषि महोत्सव में वर्चुअली किया संबोधित

कपिल माखीजा, जनशक्ति उजालासिवनी/भोपाल, मध्य प्रदेश2 मिनट पढ़ें