मध्य प्रदेश के 12 जिलों में गेहूं की खेती हतोत्साहित करेगी सरकार, मूंग पर भी नजर
कम वर्षा के बीच पानी बचाने पर जोर

मध्य प्रदेश में सामान्य से कम वर्षा वाले 12 जिलों में आगामी फसल सीजन के दौरान पानी की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए खेती की रणनीति पर जोर दिया जा रहा है। सरकार किसानों को अधिक पानी की जरूरत वाली फसलों के बजाय कम सिंचाई वाली फसलें अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी। वहीं, ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती में रसायनों के इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई गई है।
12 जिलों में सामान्य से कम वर्षा
आलीराजपुर, धार, झाबुआ, रतलाम, बैतूल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा, हरदा और शाजापुर में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। ऐसे में इन जिलों में जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने और किसानों को कम पानी की जरूरत वाली फसलों की ओर प्रोत्साहित करने पर जोर है। गेहूं की खेती को हतोत्साहित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
पैराक्वेट डाइक्लोराइड पर प्रतिबंध
ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल को जल्दी सुखाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पैराक्वेट डाइक्लोराइड पर केंद्र सरकार ने प्रतिबंध लगाया है। मध्य प्रदेश सरकार ने भी इसके इस्तेमाल पर रोक से संबंधित निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों के निर्देशानुसार, इस रसायन का भंडार मिलने पर उसे वैज्ञानिक तरीके से नष्ट कराया जाएगा और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की जा सकती है।
स्वास्थ्य और मिट्टी पर प्रभाव को लेकर चिंता
पैराक्वेट डाइक्लोराइड के संपर्क में आने से मानव स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचने का जोखिम है। इसके अलावा, मूंग की खेती में रसायनों के अत्यधिक इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता और उर्वरा शक्ति प्रभावित होने की चिंता भी जताई गई है। किसानों को प्रतिबंधित रसायनों का इस्तेमाल नहीं करने और खेती में सुरक्षित विकल्प अपनाने के प्रति जागरूक करना जरूरी है।



