मध्य प्रदेश में मत्स्य उद्योग को नई उड़ान देने की तैयारी, भोपाल कॉन्क्लेव में निवेश और निर्यात पर जोर
4.45 लाख टन तक पहुंचा मछली उत्पादन, 88.25 करोड़ रुपये से 49 जलाशयों और 5 अमृत सरोवरों के विकास की योजना

भोपाल में शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय फिशरीज इन्वेस्टर्स एंड एक्सपोर्टर्स कॉन्क्लेव-2026 का आयोजन किया गया। कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह और केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने दीप प्रज्वलित कर किया। कॉन्क्लेव में मध्य प्रदेश में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने, निवेश आकर्षित करने और मछली निर्यात के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया गया।
4.45 लाख टन तक पहुंचा मत्स्य उत्पादन
दिए गए आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान 4.45 लाख टन मत्स्य उत्पादन दर्ज किया गया। प्रदेश में मत्स्य पालन क्षेत्र में 910 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश भी हुआ है। मत्स्य निवेश एवं निर्यात प्रोत्साहन नीति-2026 के जरिए इस क्षेत्र में निवेश और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की पहल की गई है।
भोपाल के हलाली जलाशय में 316 केज वाला क्लस्टर भी मत्स्य उत्पादन की क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इससे मछली पालन और इससे जुड़ी आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।
88.25 करोड़ रुपये से जलाशयों का विकास
वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 88.25 करोड़ रुपये की लागत से 49 जलाशयों और पांच अमृत सरोवरों के विकास का प्रावधान किया गया है। इस पहल का उद्देश्य मत्स्य पालन के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और रोजगार के नए अवसर तैयार करना है।
निवेश और निर्यात बढ़ाने पर जोर
कॉन्क्लेव में मत्स्य पालन की संभावनाओं, निवेश को प्रोत्साहित करने और मछली निर्यात बढ़ाने से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई। इस क्षेत्र में कारोबारी गतिविधियों का विस्तार मछुआरों की आजीविका मजबूत करने और उनकी आय के अवसर बढ़ाने में मददगार हो सकता है।



