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एमपी में नशे के नेटवर्क पर शिकंजे की तैयारी, तीन साल के अभियान का खाका तैयार

कफ सिरप नेटवर्क से लेकर ड्रग सप्लाई तक निगरानी बढ़ेगी, मुख्य सचिव ने विभागों को दिए समन्वित कार्रवाई के निर्देश

लेखक: कपिल माखीजा, जनशक्ति उजालास्थान: भोपाल, मध्य प्रदेश2 मिनट पढ़ें
मध्य प्रदेश में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर रोक लगाने और नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने की तैयारी। (प्रतीकात्मक चित्र)
मध्य प्रदेश में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर रोक लगाने और नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने की तैयारी। (प्रतीकात्मक चित्र)
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मध्य प्रदेश में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार अगले तीन वर्षों में व्यापक अभियान चलाने की तैयारी कर रही है। इसके तहत शैक्षणिक संस्थानों में नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के साथ ही ड्रग नेटवर्क की निगरानी और अवैध सप्लाई रोकने के लिए विभागों के बीच तालमेल मजबूत किया जाएगा। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने राज्य स्तरीय एनसीओआरडी बैठक में संबंधित विभागों को समन्वित कार्ययोजना तैयार कर उसे लागू करने के निर्देश दिए।

शिक्षण संस्थानों में बनेंगी एंटी ड्रग समितियां

अभियान के शुरुआती चरण में 500 से अधिक विद्यार्थियों वाले उच्च शिक्षण संस्थानों में एंटी ड्रग समितियां गठित करने की योजना है। इनमें शिक्षक, पालक, विद्यार्थी, उच्च शिक्षा विभाग, सामाजिक न्याय विभाग और पुलिस को शामिल किया जाएगा। सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों में नशे के दुष्प्रभावों को लेकर जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे।

ड्रग नेटवर्क पर निगरानी बढ़ाने पर जोर

बैठक में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए सूचना तंत्र मजबूत करने की जरूरत बताई गई। इसके साथ ही नारकोटिक्स विभाग, एसआईबी और स्थानीय पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया। रासायनिक फैक्ट्रियों में इस्तेमाल होने वाले प्रीकर्सर रसायनों के अवैध इस्तेमाल या दूसरी जगह भेजे जाने की आशंका रोकने के लिए भी निगरानी व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए गए।

2025 और 2026 में नष्ट किए गए मादक पदार्थ

बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में 2,073 मामलों में कुल 1,44,025 किलोग्राम मादक पदार्थ नष्ट किए गए। वहीं, 30 सितंबर 2026 तक 2,756 मामलों में 1,30,380 किलोग्राम मादक पदार्थ नष्ट किए जा चुके थे।

राज्य सरकार का लक्ष्य नशीले पदार्थों की अवैध आपूर्ति और कारोबार पर प्रभावी रोक लगाना है। इसके लिए जागरूकता, निगरानी और विभागीय समन्वय को अभियान का हिस्सा बनाया जा रहा है।

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