सत्ता से बड़ा दायित्व, श्रीकृष्ण के राजधर्म से शासन चलाने पर सीएम डॉ. मोहन यादव का जोर
गीता के संदेश से सुशासन तक का सूत्र, शोधार्थियों को सरकार देगी सहयोग

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि शासन में सत्ता से अधिक महत्व दायित्व और सेवाभाव का है। भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके राजधर्म से प्रेरणा लेकर प्रशासनिक व्यवस्था में योग्यता, कर्तव्यनिष्ठा और जनसेवा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन पर शोध और मीमांसा करने वाले शोधार्थियों तथा संस्थाओं को राज्य सरकार की ओर से पूरा सहयोग देने की घोषणा भी की।
मुख्यमंत्री ने शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 को भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित दो दिवसीय चतुर्थ राष्ट्रीय एचआर-सीएसआर कॉन्फ्रेंस ‘अभ्युदय-2026’ का शुभारंभ किया। सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन को शासन, प्रशासन और दायित्व निर्वहन से जोड़कर प्रस्तुत किया।
पद से नहीं, जिम्मेदारी से तय होती है नेतृत्व की पहचान
डॉ. यादव ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि कंस वध के बाद उन्होंने स्वयं सत्ता नहीं संभाली। इसी तरह महाभारत युद्ध के बाद राजसिंहासन युधिष्ठिर को सौंपा गया। इन प्रसंगों से शासन में पद की अपेक्षा जिम्मेदारी को महत्व देने की सीख मिलती है। उन्होंने कहा कि दायित्वों का निर्धारण योग्यता के आधार पर होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीकृष्ण और सम्राट विक्रमादित्य का उदाहरण देते हुए उनके समाज और व्यवस्था के प्रति समर्पण को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जहां गीता समाप्त होती है, वहीं से जीवन का अभ्युदय शुरू होता है। श्रीकृष्ण ने विपरीत परिस्थितियों में भी मानव धर्म और राजधर्म का आदर्श प्रस्तुत किया।
सांस्कृतिक विरासत को तीर्थों से जोड़ने की पहल
संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। ‘श्रीराम वन गमन पथ’ और ‘श्रीकृष्ण पाथेय’ के माध्यम से संबंधित स्थलों को प्रमुख तीर्थ क्षेत्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। ओंकारेश्वर में नर्मदा तट पर आचार्य शंकर की स्मृति में ‘एकात्म धाम’ की स्थापना का भी उल्लेख किया गया।
कौशल विकास से लेकर सामाजिक सुधार तक चर्चा
सम्मेलन में युवाओं के रोजगार और कौशल विकास के लिए प्रदेश में तीन स्किल यूनिवर्सिटी स्थापित करने के निर्णय की जानकारी दी गई। इस दिशा में टाटा समूह के साथ विस्तार की योजना पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने बताया कि एशियाई खेलों में मध्य प्रदेश के खिलाड़ियों ने पांच स्वर्ण सहित कुल 11 पदक हासिल किए हैं।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने इंडोनेशिया से आए पद्मश्री डॉ. अगुश इंद्र उदयाना को पारंपरिक घंटी भेंट कर सम्मानित किया। कॉन्फ्रेंस संयोजक डॉ. विक्रांत सिंह तोमर ने ‘अभ्युदय’ की संकल्पना पर विचार रखे। मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी सहित विषय विशेषज्ञ और आयोजक भी मौजूद रहे। सम्मेलन में नई शिक्षा नीति, योग एवं वेलनेस, आयुष महाविद्यालयों के विस्तार और नशा मुक्ति अभियान जैसे विषयों का भी उल्लेख किया गया।



