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विजयादशमी पर निकलेगी महाकाल की शाही सवारी, 500 किलो फूलों की वर्षा से सजेगा मार्ग

दशहरा मैदान में होगा पूजन, वापसी में इंदौरगेट से लौटेगी पालकी

लेखक: कपिल माखीजा, जनशक्ति उजालास्थान: उज्जैन, मध्य प्रदेश2 मिनट पढ़ें
विजयादशमी पर उज्जैन में निकलेगी भगवान श्री महाकालेश्वर की पारंपरिक शाही सवारी।
विजयादशमी पर उज्जैन में निकलेगी भगवान श्री महाकालेश्वर की पारंपरिक शाही सवारी।
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विजयादशमी के अवसर पर मंगलवार को उज्जैन में भगवान श्री महाकालेश्वर की पारंपरिक शाही सवारी निकाली जाएगी। दोपहर 4 बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप से सवारी शुरू होगी। इस दौरान पालकी पर ड्रोन के जरिए 500 किलो फूलों की वर्षा की जाएगी। सवारी दशहरा मैदान पहुंचेगी, जहां भगवान मनमहेश और शमी वृक्ष का पूजन होगा।

पालकी को दी जाएगी सलामी, शहर में होंगे विशेष आयोजन

सवारी मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंचने पर मध्यप्रदेश सशस्त्र पुलिस बल द्वारा पालकी में विराजमान भगवान श्री मनमहेश को सलामी दी जाएगी। इसके बाद सवारी निर्धारित मार्ग से होते हुए दशहरा मैदान पहुंचेगी। आयोजन के दौरान महाकाल मंदिर बैंड और पुलिस बैंड की प्रस्तुतियां होंगी। साथ ही 10 आदिवासी नृत्य दल, 10 भजन मंडलियां और 300 वैदिक बटुक मंत्रोच्चार करेंगे।

सवारी मार्ग पर एक लाख वर्गफीट क्षेत्र में रंगोली सजाई जाएगी। इसके अलावा लाइव पेंटिंग, रजत ढोल वादन, तोपची कड़ाबीन और भारत स्काउट गाइड व कांग्रेस सेवा दल की प्रस्तुतियां भी होंगी। पांच एलईडी रथों के माध्यम से सवारी का सीधा प्रसारण किया जाएगा।

इन मार्गों से गुजरेगी शाही सवारी

मंदिर से शुरू होकर सवारी गुदरी चौराहा, पटनी बाजार, गोपाल मंदिर, सराफा, सतीगेट, नई सड़क, दौलतगंज, मालीपुरा, देवासगेट, चामुंडा चौराहा, टावर मार्ग, शहीद पार्क, घास मंडी चौराहा और माधवनगर हॉस्पिटल सहित निर्धारित मार्ग से दशहरा मैदान पहुंचेगी। वहां भगवान मनमहेश और शमी वृक्ष का पूजन किया जाएगा।

वापसी में सवारी श्री गंगा होटल मार्ग, देवास रोड, तीन बत्ती चौराहा, माधव क्लब रोड, धन्नालाल की चाल, लोक निर्माण विभाग कार्यालय, फ्रीगंज ओवरब्रिज, संख्याराजे धर्मशाला, देवासगेट, मालीपुरा, दौलतगंज चौराहा और इंदौरगेट होते हुए गदापुलिया, हरिफाटक ब्रिज, बेगमबाग और कोट मोहल्ला चौराहे से श्री महाकालेश्वर मंदिर लौटेगी।

पूजन के बाद होंगे मुखारविंद दर्शन

आयोजन के दौरान सवारी मार्ग पर सुरक्षा, सफाई, प्रकाश, चिकित्सा और अग्निशमन की व्यवस्था की जाएगी। संध्या पूजन के बाद गर्भगृह में श्रद्धालुओं को भगवान श्री महाकालेश्वर के श्री होल्कर मुखारविंद स्वरूप के दर्शन होंगे। इसके साथ ही मंदिर के शिखर पर ध्वज परिवर्तन किया जाएगा।

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