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करवा चौथ 29 अक्टूबर को, शाम 5:38 बजे से पूजा का मुहूर्त; देशभर में रात 7 से 9:10 बजे तक चंद्र दर्शन का अनुमान

चतुर्थी तिथि पर महिलाएं रखेंगी व्रत, चांद को अर्घ्य देने के बाद पूरी होगी पूजा

लेखक: कपिल माखीजा, जनशक्ति उजालास्थान: नई दिल्ली2 मिनट पढ़ें
करवा चौथ पर महिलाएं वैवाहिक सुख और पति की लंबी उम्र की कामना के साथ पूजा करती हैं। चंद्र दर्शन के बाद अर्घ्य देकर व्रत पूरा किया जाता है। (प्रतीकात्मक चित्र)
करवा चौथ पर महिलाएं वैवाहिक सुख और पति की लंबी उम्र की कामना के साथ पूजा करती हैं। चंद्र दर्शन के बाद अर्घ्य देकर व्रत पूरा किया जाता है। (प्रतीकात्मक चित्र)
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सुहाग की लंबी उम्र और वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि की कामना के साथ मनाया जाने वाला करवा चौथ इस साल गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन विवाहित महिलाएं परंपरा के अनुसार व्रत रखकर भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा करेंगी। रात में चंद्र दर्शन के बाद चांद को अर्घ्य देकर व्रत पूरा किया जाएगा। पूजा और चंद्रोदय का समय शहर के अनुसार अलग-अलग रहेगा।

शाम 5:38 से 6:56 बजे तक पूजा का मुहूर्त

ज्योतिषों के अनुसार, 29 अक्टूबर को करवा चौथ पूजा का अनुमानित समय शाम 5:38 बजे से 6:56 बजे तक है। चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर की रात करीब 1:06 बजे शुरू होकर उसी रात लगभग 10:09 बजे समाप्त होने का अनुमान है। व्रत रखने वाली महिलाएं स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा की तैयारी कर सकती हैं।

देशभर में रात 7 से 9:10 बजे तक चंद्र दर्शन की संभावना

29 अक्टूबर को देश के अलग-अलग शहरों में चांद निकलने के समय में अंतर रहेगा। अनुमान के मुताबिक, देशभर में चंद्र दर्शन का समय शाम करीब 7 बजे से रात 9:10 बजे के बीच हो सकता है। यह समय सभी शहरों के लिए एक समान नहीं है। महिलाओं को अपने शहर का स्थानीय चंद्रोदय समय देखना चाहिए। बादल छाए रहने या आसपास ऊंची इमारतें होने से चांद दिखाई देने में देरी भी हो सकती है।

सरगी और पूजा सामग्री की तैयारी

करवा चौथ पर कई महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण कर व्रत शुरू करती हैं। शाम की पूजा के लिए करवा, जल, दीपक, रोली, चावल, फूल और मिठाई जैसी सामग्री तैयार रखी जाती है। परिवार की परंपरा के अनुसार माता पार्वती, भगवान शिव और भगवान गणेश की पूजा की जाती है तथा करवा चौथ की व्रत कथा सुनी या सुनाई जाती है।

रात में चांद दिखाई देने के बाद अर्घ्य देकर पारंपरिक विधि से पूजा पूरी की जाती है। इसके बाद परिवार की परंपरा के अनुसार व्रत खोला जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा की विधि और रीति-रिवाजों में अंतर हो सकता है।

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