इंदौर के पास कालाकुंड बनेगा पिकनिक और जंगल कैंपिंग का नया ठिकाना
बारहमासी सड़क तैयार, चोरल नदी पर बनेंगे चार पुल

इंदौर से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित कालाकुंड को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की दिशा में काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्राकृतिक वादियों, घने जंगलों और आदिवासी ग्रामीण परिवेश के लिए पहचाने जाने वाला यह क्षेत्र वीकेंड पिकनिक और जंगल कैंपिंग के लिए नया आकर्षण बन सकता है। यहां करीब 10 किलोमीटर लंबी बारहमासी सड़क का निर्माण पूरा हो चुका है। अब चोरल नदी पर चार पुलों का निर्माण शुरू करने की तैयारी है। इससे पर्यटकों के साथ आसपास के गांवों के लोगों को भी आवागमन में सुविधा मिलेगी।
सड़क बनने से पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण (एमपीआरआरडीए) ने वन औषधियों से समृद्ध घने जंगलों को सुरक्षित रखते हुए सड़क निर्माण का काम वर्ष 2024 में पूरा किया था। हालांकि, नदी पर पुल नहीं होने के कारण बारिश के दौरान रास्ता बाधित हो जाता है। इससे पर्यटकों और ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। पुल बनने के बाद निजी वाहनों से कालाकुंड पहुंचना अधिक सुविधाजनक हो सकेगा।
रात्रि चौपाल में उठी थी पुल निर्माण की मांग
30 मई को कलेक्टर शिवम वर्मा ने कालाकुंड में रात्रि चौपाल आयोजित की थी। इस दौरान ग्रामीणों ने नदी पर पुल बनाने की मांग प्रमुखता से रखी थी। एमपीआरआरडीए के महाप्रबंधक लोकेंद्र मंडलोई के अनुसार, चार पुलों के निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और इसी वर्ष निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी है।
हेरिटेज ट्रेन के साथ सड़क मार्ग भी बनेगा विकल्प
विंध्याचल पर्वत श्रेणी की पहाड़ियों के बीच बसे इस क्षेत्र के सात से अधिक आदिवासी गांवों में 20 से अधिक होम स्टे संचालित हैं। यहां आने वाले पर्यटक ग्रामीण जीवन और प्राकृतिक वातावरण का अनुभव करते हैं। पातालपानी से हेरिटेज ट्रेन के जरिए भी पर्यटक कालाकुंड पहुंचते हैं। सड़क मार्ग पर पुल बनने से निजी दोपहिया और चारपहिया वाहनों से आने वाले लोगों को भी सुविधा मिलेगी। बारिश के दौरान शहर से संपर्क प्रभावित होने की समस्या भी कम हो सकेगी।
पारंपरिक कलाकंद भी है खास पहचान
कालाकुंड अपनी पारंपरिक दानेदार कलाकंद मिठाई के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां पशुपालक गाय और भैंस के दूध से कम शक्कर वाली कलाकंद तैयार करते हैं। प्राकृतिक सौंदर्य, स्थानीय खानपान और ग्रामीण परिवेश को पर्यटन से जोड़ने की संभावनाएं इस क्षेत्र को खास बनाती हैं।
आठ गांवों के ग्रामीणों को मिलेगी राहत
चोरल नदी पर चार पुल बनने से पहाड़ी क्षेत्र में बसे आठ गांवों के लोगों को स्कूल, आंगनवाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र और राशन दुकानों तक पहुंचने में सहूलियत मिलने की उम्मीद है। बारिश के दौरान नदी के कारण रास्ता बंद होने से दैनिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं। क्षेत्र में बने संभागीय स्काउट-गाइड कैंपिंग केंद्र का उपयोग बढ़ाने की संभावनाएं भी हैं। सड़क और पुलों से जुड़ी सुविधाएं बेहतर होने पर कालाकुंड में पर्यटन के साथ स्थानीय ग्रामीणों की आवाजाही को भी लाभ मिल सकता है।



