जनशक्ति उजाला
समाचार

रिटायरमेंट के बाद संजय दुबे बन सकते हैं अच्छे नेता, कैलाश विजयवर्गीय की टिप्पणी पर हंस पड़े CM मोहन यादव

सबके सामने की गई तारीफ ने खींचा ध्यान, कॉन्क्लेव में इंदौर से लेकर 2047 के शहरी विकास तक पर हुई चर्चा

लेखक: कपिल माखीजा, जनशक्ति उजालास्थान: इंदौर, मध्य प्रदेश3 मिनट पढ़ें
अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय।
अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय।
शेयर करें:

इंदौर में आयोजित अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव में नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की एक टिप्पणी ने मंच का माहौल हल्का कर दिया। अपर मुख्य सचिव संजय दुबे के भाषण की तारीफ करते हुए विजयवर्गीय ने कहा कि वे रिटायरमेंट के बाद अच्छे नेता बन सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने कही गई इस बात पर मंच पर मौजूद लोग हंस पड़े। कार्यक्रम में शहरी विकास की भावी जरूरतों, इंदौर की विकास यात्रा और प्रदेश के प्रमुख शहरों को मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित करने की योजनाओं पर भी चर्चा हुई।

संजय दुबे की प्रस्तुति से प्रभावित हुए विजयवर्गीय

अपने संबोधन में कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि संजय दुबे ने सरकारी योजनाओं और शहरी विकास से जुड़े विषयों को इतनी प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया कि उनके लिए आगे बहुत कुछ कहने की गुंजाइश नहीं बची। उन्होंने अंग्रेजी में भी दुबे के भाषण की सराहना की और उनके आत्मविश्वास का उल्लेख किया। इसके बाद रिटायरमेंट के बाद उनके अच्छे नेता बनने की बात कहकर उन्होंने मंच पर मौजूद लोगों को मुस्कुराने का मौका दिया।

2047 की जरूरतों के हिसाब से तैयार हों शहर

विजयवर्गीय ने कहा कि वर्ष 2047 तक देश की शहरी आबादी 50 प्रतिशत से अधिक होने की संभावना को देखते हुए शहरों के विकास की योजना दूरगामी सोच के साथ बनानी होगी। शहरी विकास का अर्थ केवल सड़क, मकान और ड्रेनेज जैसी बुनियादी सुविधाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए। शहरों में बेहतर जीवन स्तर, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के लिए भी अनुकूल माहौल जरूरी है।

उन्होंने शहरों को आर्थिक विकास का इंजन बताते हुए कहा कि ऐसे शहरी केंद्र विकसित किए जाने चाहिए, जहां दिन-रात गतिविधियां चलती रहें और लोगों को काम के साथ बेहतर जीवन जीने की सुविधाएं भी मिलें।

आईटी कंपनियों ने तब बताई थीं इंदौर की कमियां

विजयवर्गीय ने वर्ष 2000 का अनुभव साझा करते हुए बताया कि उस समय वे इंदौर के महापौर थे। उन्होंने तत्कालीन केंद्रीय आईटी मंत्री प्रमोद महाजन से शहर में आईटी कंपनियां लाने का आग्रह किया था। इसके बाद टीसीएस, विप्रो और इंफोसिस जैसी कंपनियों ने इंदौर की संभावनाओं का आकलन किया, लेकिन उस समय बिजली की समस्या, खराब सड़कें, नाइट लाइफ की कमी और मॉल जैसी सुविधाओं का अभाव कारोबार के विस्तार में बाधा बताया गया था।

उन्होंने कहा कि शहर को आगे बढ़ाने के लिए जनभागीदारी के साथ काम किया गया। सड़क निर्माण और पौधारोपण जैसे प्रयासों के जरिए शहरी विकास को गति देने पर जोर दिया गया।

इंदौर-भोपाल के बाद जबलपुर और ग्वालियर पर नजर

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कॉन्क्लेव में प्रदेश के शहरी विकास की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इंदौर और भोपाल को छह-छह जिलों को जोड़कर मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके बाद जबलपुर और ग्वालियर को भी इसी तर्ज पर विकसित करने की योजना है।

मुख्यमंत्री ने इंटीग्रेटेड पॉलिसी के तहत इकोनॉमिक कॉरिडोर विकसित करने और 100 मंजिला इमारतों के निर्माण की अनुमति जैसे विषयों का भी उल्लेख किया। कॉन्क्लेव में शहरी विकास को निवेश, रोजगार और नागरिक सुविधाओं के विस्तार से जोड़कर देखने पर जोर रहा।

शेयर करें:

संबंधित खबरें

इंदौर में खाद्य विभाग की 11 प्रतिष्ठानों पर जांच, 26 नमूने लिए

इंदौर में खाद्य विभाग की 11 प्रतिष्ठानों पर जांच, 26 नमूने लिए

त्योहारी बाजार में शुद्धता की पड़ताल के साथ नापतोल विभाग की कार्रवाई

कपिल माखीजा, जनशक्ति उजालाइंदौर, मध्य प्रदेश3 मिनट पढ़ें
इंदौर जनसुनवाई में 200 से अधिक आवेदन, दिव्यांग विद्यार्थियों को मिली मदद

इंदौर जनसुनवाई में 200 से अधिक आवेदन, दिव्यांग विद्यार्थियों को मिली मदद

कलेक्टर शिवम वर्मा ने सुनीं नागरिकों की समस्याएं, संध्या और वीरेंद्र की आगे की पढ़ाई में सहयोग का भरोसा दिया

कपिल माखीजा, जनशक्ति उजालाइंदौर, मध्य प्रदेश2 मिनट पढ़ें