हथकड़ी में परीक्षा देने पहुंचे, बीमारी में भी नहीं छोड़ी तैयारी; जैनेंद्र निगम ने 12वीं रैंक के साथ पाया डीएसपी बनने का मुकाम
जेल से परीक्षा केंद्र और फिर इंदौर में तैयारी तक, भिंड के जैनेंद्र की कहानी संघर्ष और दृढ़ संकल्प की मिसाल

मध्यप्रदेश के भिंड जिले के डोंगरपुरा गांव के जैनेंद्र कुमार निगम की कहानी बताती है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद लक्ष्य के प्रति समर्पण बना रहे, तो मंजिल तक पहुंचने की उम्मीद कायम रहती है। पारिवारिक विवाद और मुकदमों के चलते उन्हें जेल जाना पड़ा, लेकिन उन्होंने पढ़ाई जारी रखी। परीक्षा देने के लिए पुलिसकर्मी उन्हें हथकड़ी लगाकर केंद्र तक लेकर पहुंचे। आगे चलकर उन्होंने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षा में 12वीं रैंक हासिल कर डीएसपी बनने का सपना पूरा किया।
जेल में भी नहीं टूटी पढ़ाई की राह
जैनेंद्र के जीवन में एक समय ऐसा आया, जब पारिवारिक विवाद और कानूनी मामलों के कारण उन्हें जेल में रहना पड़ा। इन परिस्थितियों के बीच भी उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी नहीं छोड़ी। जानकारी के मुताबिक, जेल में रहते हुए उन्होंने एमपीपीएससी की परीक्षा दी और पुलिसकर्मी उन्हें हथकड़ी लगाकर परीक्षा केंद्र तक लेकर गए।
जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने इंदौर में रहकर फिर से तैयारी शुरू की। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद प्रशासनिक सेवाओं में आगे बढ़ने का उनका प्रयास जारी रहा।
पहले भी हासिल कर चुके हैं सरकारी पद
जैनेंद्र इससे पहले एमपीपीएससी में चयनित होकर नायब तहसीलदार और सहायक संचालक, स्कूल शिक्षा जैसे पद हासिल कर चुके हैं। इसके बावजूद उन्होंने डीएसपी बनने के लक्ष्य के लिए अपनी तैयारी जारी रखी।
मलेरिया और टाइफाइड के बीच दी मुख्य परीक्षा
डीएसपी बनने की राह में उन्हें स्वास्थ्य संबंधी चुनौती का भी सामना करना पड़ा। एमपीपीएससी 2023 की मुख्य परीक्षा के दौरान उन्हें मलेरिया और टाइफाइड हो गया था। बीमारी के बावजूद उन्होंने परीक्षा दी और आखिरकार 12वीं रैंक हासिल की।
जैनेंद्र कुमार निगम का सफर संघर्ष, धैर्य और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता की कहानी है। जेल में रहने से लेकर बीमारी के बीच परीक्षा देने तक, उन्होंने अपने प्रयास जारी रखे और डीएसपी बनने का लक्ष्य हासिल किया।



