युद्ध ने पलट दिया चावल का बाजार, भारत में सस्ता हुआ बासमती!
निर्यात ठप होने से बंदरगाहों पर अटका माल, कारोबारियों की परेशानी के बीच ग्राहकों को राहत

ईरान-इजराइल युद्ध ने भारतीय चावल कारोबार का गणित बिगाड़ दिया है। समुद्री मार्ग बाधित होने और निर्यात प्रभावित होने से गुजरात के बंदरगाहों पर चावल का बड़ा स्टॉक अटक गया है। विदेशी बाजारों तक माल नहीं पहुंचने के कारण व्यापारी घरेलू बाजार में चावल बेच रहे हैं। इसका असर कीमतों पर दिखने लगा है और थोक व खुदरा बाजार में चावल के दाम 10 से 15 रुपये प्रति किलो तक गिर गए हैं। इससे कारोबारियों की चिंता बढ़ी है, वहीं आम उपभोक्ताओं को राहत मिली है। हालांकि, सुपर स्टोर में बिकने वाले पैक्ड चावल की कीमतों में अब तक कमी नहीं आई है।
बंदरगाहों पर फंसा चावल, निर्यातकों की बढ़ी मुश्किलें
भारत के बासमती चावल के प्रमुख खरीदारों में सऊदी अरब और ईरान शामिल हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने ईरान को बड़ी मात्रा में बासमती चावल का निर्यात किया। युद्ध के कारण व्यापार प्रभावित होने से गुजरात के कांडला और मुंद्रा बंदरगाहों पर करीब एक लाख टन चावल फंसा होने की जानकारी है।
निर्यात में रुकावट के साथ भुगतान अटकने की आशंका ने भी कारोबारियों की चिंता बढ़ाई है। कुछ व्यापारियों ने फिलहाल ईरान को चावल भेजने से दूरी बना ली है। निर्यात विशेषज्ञ सुविध शाह के अनुसार, बंदरगाहों पर स्टॉक जमा होने और माल बाहर नहीं जा पाने के कारण व्यापारी घरेलू बाजार में चावल बेच रहे हैं। इससे कीमतों में गिरावट आई है।
मध्यप्रदेश के कारोबार पर भी असर
मध्यप्रदेश से हर साल करीब 4,000 करोड़ रुपये के चावल का निर्यात होता है। नर्मदापुरम जिले के पिपरिया से ईरान और अरब देशों में लगभग 75 हजार टन बासमती और सेला चावल भेजे जाते हैं। युद्ध के कारण निर्यात प्रभावित होने से यहां के कारोबारियों के सामने भी मुश्किलें बढ़ी हैं।
भोपाल, जबलपुर और विदिशा चावल उत्पादन के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हैं। मंडीदीप से भी चावल विदेश भेजा जाता है। एसोसिएशन ऑफ ऑल इंडस्ट्रीज मंडीदीप के चेयरमैन राजीव अग्रवाल के मुताबिक, यहां से यूरोपीय देशों के लिए रेल के जरिये चावल की रैक रवाना होती है। मंडीदीप से सालाना करीब 30 हजार टन चावल का निर्यात किया जाता है।
उपभोक्ताओं को राहत, कारोबारियों को नुकसान की चिंता
निर्यात में रुकावट से चावल कारोबारियों के सामने स्टॉक और भुगतान का संकट खड़ा हो रहा है। दूसरी ओर, घरेलू बाजार में कीमतें घटने से खरीदारों को राहत मिली है। आगे चावल के दाम किस दिशा में जाएंगे, यह निर्यात बहाल होने और बंदरगाहों पर अटके माल की निकासी पर निर्भर करेगा।



