इंदौर में अक्टूबर से ही गहराने लगा जलसंकट, सूखे तालाबों ने बढ़ाई चिंता; लोग पैसे देकर खरीद रहे पानी
कई इलाकों में बोरिंग जवाब देने लगे, नगर निगम ने टैंकरों और जलापूर्ति व्यवस्था बढ़ाने की तैयारी की

इंदौर में इस बार मानसून की कमजोर बारिश का असर अब दिखने लगा है। अक्टूबर के अंत में ही शहर के कई इलाकों में पानी की किल्लत बढ़ गई है। तालाबों का जलस्तर घटने और बोरिंग से पानी कम मिलने के कारण लोगों को निजी हैंडपंप, बोरिंग और टैंकरों पर निर्भर होना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि कुछ परिवार पानी खरीदने पर हर महीने करीब 1,500 रुपये खर्च कर रहे हैं, जबकि टैंकर मंगवाने के लिए 2,000 रुपये तक देने पड़ रहे हैं। कुछ रहवासी पानी भरने के लिए रिक्शे में बर्तन रखकर 3 से 4 किलोमीटर दूर तक जा रहे हैं।
कई तालाब सूखे, बाकी में भी घटा पानी
छोटी बिलावली और लिंबोदी तालाब सूख चुके हैं। पिपल्यापाला और बड़ी बिलावली में भी पानी कम बचा है। यशवंत सागर में फिलहाल 16.4 फीट पानी है, जबकि इसकी अधिकतम क्षमता 19 फीट है। नगर निगम के जलकार्य प्रभारी अभिषेक शर्मा बबलू के मुताबिक, यहां से करीब 30 एमएलडी पानी की आपूर्ति होती है। उन्होंने बताया कि मालवा-गंभीर लाइन के जरिए पानी लाने की तैयारी चल रही है। दिसंबर तक पानी पहुंचाने की योजना है।
वर्षों से परेशान रहवासी, टंकी से सप्लाई पर सवाल
वार्ड 35 के तलावली चांदा गांव, बजरंग नगर, रविदास नगर और निरंजनपुर झाडू बस्ती सहित कई क्षेत्रों में लंबे समय से पानी की समस्या बनी हुई है। कुछ रहवासियों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हुआ। कांग्रेस नेता सुभाष सोलंकी ने दावा किया कि क्षेत्र में बनी टंकी में करीब 35 लाख लीटर पानी आने के बावजूद घरों तक इसकी आपूर्ति नहीं हो रही। उन्होंने वितरण व्यवस्था की जांच की मांग की है।
वार्ड 16, 20, 28, 30, 37, 45, 51, 63 और 79 के रहवासियों ने भी नियमित जलापूर्ति की मांग उठाई है। सामाजिक कार्यकर्ता किशोर कोडवानी के अनुसार, पिछले 60 वर्षों में यह दूसरी बार है जब शहर इतने गंभीर जलसंकट का सामना कर रहा है। उनके मुताबिक, इस साल बारिश सामान्य से 14 इंच कम रही।
निगम की तैयारी, समाधान पर टिकी निगाहें
नगर निगम 85 वार्डों में हाइड्रेंट लगाने, 100 नए टैंकर खरीदने और करीब 6,000 सरकारी बोरिंग की सर्विसिंग कराने की तैयारी कर रहा है। चार नई पानी की टंकियां भी बनाई जा रही हैं, जिनसे जनवरी से आपूर्ति शुरू करने की योजना है।
इधर, इंदौर हाई कोर्ट की पीठ ने सूखते तालाबों तक नर्मदा का पानी पहुंचाने के प्रस्ताव पर राज्य सरकार से दो सप्ताह में निर्देश लेने को कहा है। आने वाले महीनों में पानी की मांग बढ़ने के बीच अब चुनौती यह है कि प्रस्तावित इंतजाम कितनी जल्दी लागू होते हैं।



