इंदौर में जल संकट से निपटने की तैयारी, रोज 3 करोड़ लीटर पानी का होगा पुनः उपयोग
मंत्री विजयवर्गीय की अपील, महापौर भार्गव ने जल प्रबंधन योजनाओं की समीक्षा की

इंदौर में सामान्य से कम बारिश के बाद आगामी गर्मियों में जल संकट की आशंका को देखते हुए जल संरक्षण और उपचारित पानी के दोबारा उपयोग पर जोर दिया जा रहा है। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने नागरिकों से पानी की बर्बादी रोकने की अपील की है। वहीं, महापौर पुष्यमित्र भार्गव की अध्यक्षता में नगर निगम की समीक्षा बैठक में सीवरेज और जल प्रबंधन से जुड़ी योजनाओं पर चर्चा की गई। नगर निगम की योजना चार स्थानों पर कुल 30 एमएलडी क्षमता के टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने की है, जिनसे प्रतिदिन लगभग तीन करोड़ लीटर उपचारित पानी का पुनः उपयोग किया जा सकेगा।
मंत्री विजयवर्गीय ने सोशल मीडिया पर साझा किया वीडियो संदेश
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स के माध्यम से वीडियो संदेश साझा कर नागरिकों से पानी बचाने की अपील की। उन्होंने परिवार के सदस्यों के साथ बैठकर पानी की खपत कम करने की योजना बनाने, टंकियों में पानी बहने से रोकने के लिए ओवरफ्लो अलार्म लगाने और आरओ से निकलने वाले अतिरिक्त पानी का उपयोग फर्श की सफाई जैसे कामों में करने की सलाह दी। उन्होंने शॉवर के बजाय बाल्टी से नहाने और रोजमर्रा के कामों में पानी की बर्बादी रोकने पर भी जोर दिया।
विजयवर्गीय के मुताबिक, मालवा-निमाड़ क्षेत्र में सामान्यतः 30 से 40 इंच बारिश होती है, जबकि इस बार औसत बारिश लगभग 20 से 21 इंच रहने की बात कही गई है। उन्होंने लोगों से पानी बचाने का संकल्प लेने और इस संदेश को पूरे क्षेत्र में फैलाने की अपील की।
चार स्थानों पर बनेंगे उपचारित पानी के संयंत्र
नगर निगम की प्रस्तावित योजना के तहत सांवेर औद्योगिक क्षेत्र में 3 एमएलडी, कनाड़िया में 8 एमएलडी, टिगरिया बादशाह तालाब में 9 एमएलडी और कबिटखेड़ी एसटीपी परिसर में 10 एमएलडी क्षमता के टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जाने हैं। इनकी कुल प्रस्तावित क्षमता 30 एमएलडी होगी, यानी प्रतिदिन तीन करोड़ लीटर पानी के उपचार और पुनः उपयोग की क्षमता।
उपचारित पानी का इस्तेमाल उद्यानों की सिंचाई, सड़क धुलाई, निर्माण कार्य, सीवर सफाई और धूल नियंत्रण जैसे कामों में किया जा सकेगा। इसके अलावा सरकारी भवनों, अस्पतालों, एयरपोर्ट, मेट्रो और औद्योगिक क्षेत्रों में भी इसके उपयोग की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इसका उद्देश्य उन कार्यों में पेयजल की खपत कम करना है, जहां पीने योग्य पानी की आवश्यकता नहीं होती।
21.59 करोड़ रुपये से बनेगा वितरण नेटवर्क
‘जल ही अमृत’ परियोजना के तहत उपचारित पानी के भंडारण और वितरण के लिए 21.59 करोड़ रुपये की लागत से नेटवर्क विकसित करने का प्रस्ताव है। इसमें स्कीम नंबर 78 में 30 लाख लीटर क्षमता का ओवरहेड टैंक और कबिटखेड़ी एसटीपी परिसर में 15 लाख लीटर क्षमता का भूमिगत जल भंडारण टैंक बनाने की योजना शामिल है। इसके साथ पंपिंग व्यवस्था और वितरण पाइपलाइन भी विकसित की जाएगी।
प्रस्तावित नेटवर्क से निपानिया, बॉम्बे हॉस्पिटल क्षेत्र, महालक्ष्मी नगर, देवास नाका और न्यू लोहा मंडी सहित चिन्हित इलाकों तक उपचारित पानी पहुंचाने की योजना है। परियोजना में 133 उद्यानों को जोड़ने का लक्ष्य है, जिनमें 23 मौजूदा और 110 नए उद्यान शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 30 हाइड्रेंट स्थापित करने का भी प्रस्ताव है।
22 जोन में सीवर लाइनों के सुधार की योजना
महापौर पुष्यमित्र भार्गव की अध्यक्षता में सिटी बस कार्यालय में हुई समीक्षा बैठक में सीवरेज, ड्रेनेज, नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, तालाबों में जल संग्रहण और कान्ह-सरस्वती नदी की सफाई से जुड़े कार्यों पर भी चर्चा हुई। नगर निगम की योजना के अनुसार, शहर के 22 जोन में 162.03 किलोमीटर सीवर लाइन के पुनर्वास या प्रतिस्थापन के लिए 165.88 करोड़ रुपये के कार्य प्रस्तावित हैं। बैठक में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों और संबंधित जल एवं सीवरेज परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
योजनाओं के क्रियान्वयन पर रहेगा जोर
उपचारित पानी का नियमित उपयोग बढ़ाने के लिए संयंत्रों और पाइपलाइन नेटवर्क का समय पर निर्माण, पानी की गुणवत्ता की जांच और उपयोग करने वाले विभागों की जरूरत के अनुसार आपूर्ति जरूरी होगी। इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से उद्यानों और अन्य गैर-पेयजल कार्यों में ताजे पानी की खपत घटाने में मदद मिल सकती है। नागरिकों की भागीदारी से घरों में पानी की बचत और नगर निगम के स्तर पर उपचारित पानी का पुनः उपयोग, इंदौर की आगामी गर्मियों की जल प्रबंधन रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से होंगे।



