इंदौर-उज्जैन-भोपाल को मिलेगी महानगरीय पहचान, अर्बन कॉन्क्लेव 2.0 में बोले सीएम डॉ. मोहन यादव
2047 तक 20 लाख रोजगार का लक्ष्य, 30 हजार एकड़ तक सुनियोजित शहरी विकास की तैयारी

मध्यप्रदेश में शहरी विकास को नई दिशा देने के लिए इंदौर, उज्जैन और भोपाल को महानगरीय क्षेत्र के रूप में विकसित करने की योजना पर काम जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को इंदौर में मध्यप्रदेश अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 के शुभारंभ पर कहा कि वर्ष 2047 तक इस क्षेत्र में 20 लाख रोजगार के अवसर सृजित करने और 25 से 30 हजार एकड़ भूमि पर नियोजित शहरी विकास का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत 12 से 15 नई टाउनशिप विकसित करने तथा इंदौर फ्यूचर सिटी में लगभग 5 हजार एकड़ क्षेत्र में आवास, उद्योग और रोजगार आधारित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
शहरों को आर्थिक विकास का केंद्र बनाने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरों का विकास केवल आवासीय विस्तार तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इन्हें उद्योग, व्यापार, निवेश और रोजगार के प्रमुख केंद्रों के रूप में विकसित करना जरूरी है। आधुनिक अधोसंरचना, जल सुरक्षा, किफायती आवास और बेहतर नागरिक सुविधाओं को भविष्य की शहरी योजनाओं का हिस्सा बनाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक लगभग 12 लाख करोड़ रुपये के निवेश को धरातल पर उतारा जा चुका है। औद्योगिक कॉरिडोर, सड़क नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन, नवीकरणीय ऊर्जा और आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य इन प्रयासों के माध्यम से प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों का विस्तार करना है।
2,013 करोड़ रुपये की शहरी परियोजनाओं के लिए समझौते
कॉन्क्लेव में जल प्रदाय, सीवरेज और शहरी अधोसंरचना से संबंधित परियोजनाओं के लिए कुल 2,013.81 करोड़ रुपये की वित्तीय व्यवस्था के समझौते किए गए। इसमें उज्जैन के मंदिर सर्किट के विकास के लिए 643.39 करोड़ रुपये, इंदौर की जल प्रदाय एवं सीवरेज परियोजनाओं के लिए 1,320.42 करोड़ रुपये और रीवा की जल प्रदाय योजना के लिए 50 करोड़ रुपये शामिल हैं।
कार्यक्रम में उपचारित अपशिष्ट जल के पुनर्चक्रण एवं पुनः उपयोग और किफायती आवास से जुड़ी नीतियों के प्रारूप भी जनपरामर्श के लिए जारी किए गए। उपचारित जल के पुनः उपयोग का लक्ष्य वर्ष 2037 तक 50 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। भूमि विकास और भवन निर्माण नियमों को सरल बनाने के प्रस्ताव भी प्रस्तुत किए गए।
आठ जिलों के आर्थिक विकास का रोडमैप
मुख्यमंत्री ने नीति आयोग की इंदौर आर्थिक क्षेत्र (आईईआर)-2047 की आर्थिक योजना रिपोर्ट का विमोचन किया। इसमें इंदौर, उज्जैन, धार, देवास, रतलाम, खरगोन, खंडवा और शाजापुर को एकीकृत आर्थिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने की रूपरेखा है।
योजना के अनुसार, क्षेत्र की मौजूदा 37.4 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था को वर्ष 2047 तक 500 से 600 अरब डॉलर तक पहुंचाने, 12 लाख से अधिक रोजगार सृजित करने और 100 अरब डॉलर से अधिक निजी निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य है। इसके लिए विनिर्माण, इलेक्ट्रिक वाहन, फार्मा, टेक्सटाइल, खाद्य प्रसंस्करण, धार्मिक पर्यटन, परिवहन और नवाचार से जुड़ी परियोजनाएं प्रस्तावित की गई हैं।
भोपाल में 2,250 करोड़ रुपये की डेला रेसकोर्स परियोजना
कॉन्क्लेव के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न कंपनियों और निवेशकों के प्रतिनिधियों के साथ वन-टू-वन चर्चा की। डेला ग्रुप के संस्थापक एवं सीएमडी जिमी मिस्त्री के साथ भोपाल में 220 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित 2,250 करोड़ रुपये की डेला रेसकोर्स परियोजना पर विचार-विमर्श हुआ। इसमें लक्जरी विला, ब्रांडेड आवास, पांच सितारा वाइल्डलाइफ रिसॉर्ट और घुड़सवारी एवं पोलो की सुविधाएं विकसित करने की योजना है। भोपाल के निकट रातापानी क्षेत्र में डेला रिजर्व टाउनशिप विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा गया।
इसके अलावा सौर एवं पवन ऊर्जा, फ्लोटिंग सोलर तकनीक, स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन, डिजिटल सेवाओं, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, पर्यटन और अपशिष्ट जल प्रबंधन के क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
जल संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा पर भी जोर
कॉन्क्लेव में भोपाल और इंदौर नगर निगम की सतत विकास रिपोर्ट जारी की गईं। नगरीय निकायों में सौर ऊर्जा के उपयोग, बिजली खर्च कम करने और वित्तीय संसाधन जुटाने के विकल्पों पर भी चर्चा हुई। बिरसिंहपुर में प्रस्तावित 200 मेगावाट की फ्लोटिंग सोलर परियोजना और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली की अनुमानित लागत लगभग 1,564 करोड़ रुपये बताई गई।
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि शहर आर्थिक विकास के प्रमुख इंजन हैं और उनके विकास में नागरिकों की भागीदारी महत्वपूर्ण है। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने भी प्रदेश की विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने में शहरी क्षेत्रों की भूमिका को रेखांकित किया।
कॉन्क्लेव में प्रस्तुत योजनाओं का केंद्र शहरी अधोसंरचना, आवास, निवेश, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ आगे बढ़ाना रहा। राज्य सरकार इन क्षेत्रों में निजी निवेश और संस्थागत सहयोग के माध्यम से वर्ष 2047 तक निर्धारित आर्थिक एवं शहरी विकास लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में काम कर रही है।



