राजवाड़ा पर रोशन हुई गरीबों की दिवाली, फुटपाथ के दुकानदारों को मिला कारोबार का सहारा
महापौर और निगम की पहल से छोटे व्यापारियों के चेहरों पर लौटी त्योहार की रौनक, खरीदारी के लिए पहुंच रहे लोग

दिवाली की खुशियां तभी पूरी होती हैं, जब त्योहार की रोशनी समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। इंदौर के राजवाड़ा पर इन दिनों कुछ ऐसा ही नजारा दिखाई दे रहा है। यहां फुटपाथ और रेहड़ी-पटरी पर छोटी दुकानें लगाकर परिवार चलाने वाले व्यापारियों को दिवाली के अवसर पर कारोबार का मौका मिला है। नगर निगम और महापौर पुष्यमित्र भार्गव की पहल से अस्थायी रूप से उपलब्ध कराई गई जगह पर सजी दुकानों में त्योहार की रौनक नजर आने लगी है। खास बात यह है कि लोग भी इन दुकानदारों से उत्साह के साथ खरीदारी कर रहे हैं।
हादसे के बाद खाली हुई जगह बनी रोजगार का सहारा
राजवाड़ा का यह वही इलाका है, जहां कुछ समय पहले बस हादसे ने पूरे शहर को झकझोर दिया था। अब इसी स्थान का उपयोग दिवाली के दौरान छोटे व्यापारियों को दुकान लगाने की जगह देने के लिए किया जा रहा है। अस्थायी व्यवस्था के तहत यहां दुकानें सजाई गई हैं, जहां फुटपाथ पर सामान बेचकर आजीविका चलाने वाले लोगों को अपने उत्पाद ग्राहकों तक पहुंचाने का अवसर मिला है।
छोटे दुकानदारों के लिए भी त्योहार की उम्मीद
महापौर और नगर निगम का यह निर्णय इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन छोटे कारोबारियों के लिए त्योहार का मौसम साल की कमाई का अहम अवसर होता है। सीमित संसाधनों के बीच दुकान लगाने वाले इन लोगों को यदि कारोबार के लिए उचित जगह मिलती है तो उनके परिवारों की दिवाली भी बेहतर हो सकती है। प्रशासन की इस पहल ने उन्हें बाजार में अपनी जगह बनाने का अवसर दिया है।
बाजार में दिखने लगी दिवाली की रौनक
राजवाड़ा पर सजती दुकानों और खरीदारी करते लोगों के बीच त्योहार का उत्साह साफ दिखाई दे रहा है। यह तस्वीर बताती है कि दिवाली की असली चमक केवल रोशनी और सजावट में नहीं, बल्कि उन चेहरों की मुस्कान में भी है जिन्हें त्योहार पर रोजी-रोटी कमाने का अवसर मिला है। जरूरत है कि ऐसी व्यवस्थाओं में छोटे व्यापारियों की आजीविका के साथ आम लोगों की सुविधा और यातायात का संतुलन भी बना रहे। आखिर दिवाली का उजाला तभी सार्थक है, जब खुशियों का हिस्सा समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।



