दशहरे पर रावण दहन नहीं, इंदौर के इस मंदिर में होती है पूजा; 30 साल से महायज्ञ कर रहा गौहर परिवार
मंदिर में रावण चालीसा, परिवार के नाम भी अनोखे

देशभर में विजयादशमी पर रावण दहन की परंपरा निभाई जाती है, लेकिन इंदौर में एक ऐसा मंदिर है, जहां दशहरे पर रावण का पुतला जलाने के बजाय उसकी पूजा की जाती है। लंकेश्वर महादेव मंदिर में विजयादशमी पर विशेष पूजन, हवन और महायज्ञ का आयोजन होता है। मंदिर के पुजारी महेश गौहर और उनका परिवार रावण को विद्वान ब्राह्मण मानकर उसका सम्मान करता है। परिवार की मान्यता है कि रावण की विद्वता के कारण उसकी पूजा की जानी चाहिए।
रावण के साथ परिवार की भी प्रतिमाएं
लंकेश्वर महादेव मंदिर में रावण के साथ उसके परिवार के सदस्यों की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। इनमें मेघनाथ, कुंभकरण, शूर्पणखा, कैकसी, खर, दूषण और मंदोदरी शामिल हैं। पुजारी महेश गौहर और उनका परिवार नियमित रूप से सुबह-शाम रावण की पूजा करता है। दशहरे पर होने वाले विशेष पूजन और महायज्ञ में शामिल होने के लिए श्रद्धालु भी मंदिर पहुंचते हैं।
गौहर परिवार रावण दहन की परंपरा से सहमत नहीं है। परिवार की मान्यता है कि रावण एक विद्वान ब्राह्मण था और उसकी विद्वता का सम्मान किया जाना चाहिए। इसी आस्था के चलते परिवार दशहरे पर रावण की पूजा करता है और उसकी लंबी उम्र की कामना के साथ महायज्ञ आयोजित करता है। परिवार के अनुसार, यह परंपरा करीब 30 वर्षों से निभाई जा रही है।
मंदिर में रखी है रावण चालीसा
इस मंदिर की एक खास बात यहां रखी रावण चालीसा भी है। गौहर परिवार की आस्था केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार के सदस्यों के नाम भी रावण के परिवार से प्रेरित हैं। महेश गौहर के पोते का नाम लंकेश है। परिवार में मेघनाथ, कुंभकर्ण, शूर्पणखा, कैकसी, खर, दूषण और मंदोदरी जैसे नाम भी रखे गए हैं।
10 अक्टूबर 2010 को हुई थी मंदिर की स्थापना
लंकेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना 10 अक्टूबर 2010 को हुई थी। यहां रावण के प्रति आस्था रखने वाले श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। विजयादशमी पर होने वाला विशेष पूजन इस मंदिर को इंदौर के अन्य मंदिरों से अलग पहचान देता है।



