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हेड कांस्टेबल फिरोज खान का नाम 150 करोड़ की बताई जा रही जमीन की रजिस्ट्री में आया सामने

मगरखेड़ा की 45 बीघा जमीन का सौदा 9 करोड़ में दर्ज, परिवार ने अदालत में दी चुनौती

लेखक: कपिल माखीजा, जनशक्ति उजालास्थान: इंदौर, मध्य प्रदेश2 मिनट पढ़ें
मध्यप्रदेश के चर्चित हेड कांस्टेबल फिरोज खान का नाम इंदौर-उज्जैन हाईवे स्थित मगरखेड़ा गांव की जमीन की रजिस्ट्री के मामले में सामने आया है।
मध्यप्रदेश के चर्चित हेड कांस्टेबल फिरोज खान का नाम इंदौर-उज्जैन हाईवे स्थित मगरखेड़ा गांव की जमीन की रजिस्ट्री के मामले में सामने आया है।
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मध्यप्रदेश के चर्चित हेड कांस्टेबल फिरोज खान का नाम इंदौर-उज्जैन हाईवे स्थित मगरखेड़ा गांव की जमीन की रजिस्ट्री के मामले में सामने आया है। करीब 45 बीघा जमीन की रजिस्ट्री 9 करोड़ रुपये के बिक्री मूल्य पर दर्ज होने की जानकारी है, जबकि परिवार और स्थानीय लोगों ने इसकी बाजार कीमत करीब 150 करोड़ रुपये होने का दावा किया है। जमीन के हस्तांतरण की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठे हैं और मामला जांच के दायरे में है।

64 करोड़ से अधिक की संपत्तियों के बाद फिर चर्चा में नाम

इंदौर के पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में पदस्थ हेड कांस्टेबल (ड्राइवर) फिरोज खान पहले भी लोकायुक्त की जांच को लेकर चर्चा में रहे हैं। जांच के दौरान उनकी 64 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की 48 संपत्तियों का खुलासा होने की जानकारी सामने आई थी। अब मगरखेड़ा की जमीन की रजिस्ट्री से जुड़े मामले में उनका नाम सामने आने के बाद सौदे की परिस्थितियों पर ध्यान केंद्रित हुआ है।

27 अगस्त 2024 को हुई थी रजिस्ट्री

दस्तावेजों के मुताबिक, 27 अगस्त 2024 को जमीन की रजिस्ट्री श्याम इंफ्रा के सुमित जिंदल के नाम दर्ज हुई थी। इसमें बिक्री मूल्य 9 करोड़ रुपये बताया गया है। दूसरी ओर, परिवार और स्थानीय लोगों का दावा है कि जमीन की बाजार कीमत करीब 150 करोड़ रुपये थी। दर्ज बिक्री मूल्य और बताई जा रही बाजार कीमत के बीच बड़े अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

बुजुर्ग महिला के अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान सौदे का आरोप

परिवार का आरोप है कि 83 वर्षीय कस्तूरी बाई के रतलाम से इंदौर के अस्पताल में आईसीयू में भर्ती रहने के दौरान पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए जमीन की रजिस्ट्री कराई गई थी। कस्तूरी बाई की 2 सितंबर को मौत हो गई। परिवार ने सौदे को चुनौती देते हुए अदालत में रजिस्ट्री शून्य घोषित करने की मांग की है।

नामांतरण निरस्त, जांच के निष्कर्ष का इंतजार

मामले से जुड़ी जानकारी के अनुसार, राजस्व अदालत में अपील के बाद जमीन का नामांतरण निरस्त किया गया था। लोकायुक्त इस जमीन के सौदे और संबंधित लोगों की भूमिका के बारे में जानकारी जुटा रहा है। रजिस्ट्री की परिस्थितियों, दस्तावेजों और संबंधित पक्षों की भूमिका की जांच के बाद ही किसी अनियमितता के बारे में स्पष्ट निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।

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