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इंदौर आर्थिक क्षेत्र का बड़ा लक्ष्य: 2047 तक 57 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था, आठ जिलों का होगा कायाकल्प

80 से अधिक परियोजनाओं और 20 से ज्यादा नीतिगत सुधारों के जरिए विकास की तैयारी

लेखक: कपिल माखीजा, जनशक्ति उजालास्थान: इंदौर, मध्य प्रदेश3 मिनट पढ़ें
प्रतीकात्मक चित्र
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मध्यप्रदेश में क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई दिशा देने के लिए नीति आयोग की योजना में इंदौर और आसपास के सात जिलों को शामिल कर ‘इंदौर आर्थिक क्षेत्र’ विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मौजूदा करीब 3.52 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर वर्ष 2047 तक 57.06 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने की योजना है। इसमें इंदौर, उज्जैन, धार, रतलाम, देवास, खरगोन, खंडवा और शाजापुर जिले शामिल हैं।

28 अक्टूबर को इंदौर में होने वाले ‘अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0’ में इस विकास योजना से जुड़ी घोषणाएं प्रस्तावित हैं। नीति आयोग के सहयोग से क्षेत्र का मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। योजना को आगे बढ़ाने के लिए 80 से अधिक परियोजनाओं और 20 से ज्यादा नीतिगत सुधारों का खाका तैयार किया गया है।

आठ जिलों के विकास के लिए बनेगी संयुक्त व्यवस्था

योजना के तहत इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन रीजन अथॉरिटी क्षेत्रीय विकास का संचालन करेगी। अथॉरिटी के गठन से पहले आठों जिलों के कलेक्टर इस दिशा में काम करेंगे। प्रस्तावित व्यवस्था में मुख्यमंत्री इसकी अध्यक्षता करेंगे। क्षेत्र के नगर निकायों और विकास प्राधिकरणों के बीच समन्वय से परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की योजना है।

सड़क, रेल और मेट्रो कनेक्टिविटी पर जोर

क्षेत्रीय विकास के रोडमैप में करीब 1,100 किलोमीटर सड़कों और राजमार्गों, 864 किलोमीटर इंटरसिटी रेल नेटवर्क तथा इंदौर, उज्जैन और देवास को जोड़ने वाली 118 किलोमीटर क्षेत्रीय मेट्रो परियोजना का उल्लेख है। बेहतर संपर्क व्यवस्था के जरिए औद्योगिक गतिविधियों और शहरों के बीच आवाजाही को मजबूत करने की तैयारी है।

फ्यूचर सिटी और नए औद्योगिक केंद्रों की योजना

योजना में 5,000 एकड़ में ‘इंदौर फ्यूचर सिटी’ विकसित करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा फार्मा, कपड़ा, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक वाहन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों के लिए लगभग 6,700 एकड़ में औद्योगिक और फूड प्रोसेसिंग हब विकसित किए जाने हैं। उज्जैन और रतलाम के बीच 2,000 एकड़ में अंतरराष्ट्रीय खाद्य प्रसंस्करण केंद्र भी प्रस्तावित है।

पर्यटन, कौशल और तकनीकी क्षेत्र को बढ़ावा

धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के लिए उज्जैन के महाकाल लोक, ओंकारेश्वर के एकात्म धाम और धार के मांडव को जोड़कर ‘ज्योतिर्लिंग टेम्पल सर्किट’ तैयार करने की योजना है।

शिक्षा और उद्योग के बीच तालमेल बढ़ाने के लिए 500 एकड़ में बिजनेस स्कूल हब तथा पांच जिलों में एकीकृत कौशल प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव है। वहीं, आईआईटी इंदौर के पास 200 एकड़ में सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर विकसित करने की योजना भी शामिल है।

ग्रोथ कॉन्क्लेव में समझौतों और नीतियों पर जोर

योजना को आगे बढ़ाने के लिए औद्योगिक उपयोग में उपचारित अपशिष्ट जल के इस्तेमाल, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत क्षमता निर्माण और होटल-रेस्तरां क्षेत्र में कचरा प्रबंधन से जुड़े समझौतों की तैयारी है। इसके साथ मध्यप्रदेश शहरी किफायती आवास एवं पर्यावास नीति और उपचारित अपशिष्ट जल के पुनर्चक्रण तथा पुन: उपयोग की नीति 2026 से जुड़ी घोषणाएं भी कॉन्क्लेव में प्रस्तावित हैं।

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