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दूध उत्पादन बढ़ाने की तैयारी, श्रेष्ठ दूध उत्पादक पशुपालक को मिलेगा एक लाख रुपये का पुरस्कार

इंदौर संभाग में दूध उत्पादन का स्तर 9 से 20 प्रतिशत तक बढ़ाने पर जोर

लेखक: कपिल माखीजा, जनशक्ति उजालास्थान: इंदौर, मध्य प्रदेश3 मिनट पढ़ें
इंदौर में पशुपालन और डेयरी विकास की समीक्षा बैठक में दूध उत्पादन बढ़ाने, उन्नत नस्ल के गोवंश को प्रोत्साहित करने और पशुपालकों को योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर चर्चा हुई।
इंदौर में पशुपालन और डेयरी विकास की समीक्षा बैठक में दूध उत्पादन बढ़ाने, उन्नत नस्ल के गोवंश को प्रोत्साहित करने और पशुपालकों को योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर चर्चा हुई।
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इंदौर संभाग में पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए दूध उत्पादन बढ़ाने, उन्नत नस्ल के गोवंश को प्रोत्साहित करने और पशुओं के पोषण एवं स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की तैयारी है। कृषि उत्पादन आयुक्त के.सी. गुप्ता की अध्यक्षता में 22 अक्टूबर को हुई समीक्षा बैठक में अधिकारियों को पशुपालकों को नस्ल सुधार, संतुलित आहार और समय पर टीकाकरण के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए गए। बैठक में दूध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने पर जोर दिया गया।

श्रेष्ठ दूध उत्पादक को मिलेगा एक लाख रुपये का पुरस्कार

बैठक में गोपाल कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना के प्रचार-प्रसार पर भी चर्चा हुई। योजना के तहत सबसे अधिक दूध देने वाली गाय के पशुपालक को प्रथम पुरस्कार के रूप में एक लाख रुपये, द्वितीय पुरस्कार के रूप में 50 हजार रुपये और तृतीय पुरस्कार के रूप में 25 हजार रुपये दिए जाएंगे। प्रतियोगिता आगामी गोवर्धन पूजा पर आयोजित की जाएगी। योजना का उद्देश्य भारतीय उन्नत नस्ल के गोवंश के पालन को प्रोत्साहित करना और पशुपालकों की आय बढ़ाने में मदद करना है।

डेयरी इकाइयों और दूध संकलन का होगा विस्तार

के.सी. गुप्ता ने डॉ. भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। इस योजना के तहत डेयरी स्थापित करने के लिए पशुपालकों को ऋण सहायता उपलब्ध कराई जाती है। अधिकारियों से कहा गया कि उन्नत नस्ल के गोवंश के पालन के साथ पशुओं की नस्ल सुधार, पोषण और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाई जाए।

बैठक में इंदौर सहकारी दूध संघ को संभाग में दूध संकलन बढ़ाने और सभी जिलों में दूध से बने उत्पादों की बिक्री के लिए नए पार्लर स्थापित करने के निर्देश दिए गए। पशुओं की खरीद-बिक्री के लिए पशु मेलों और पशु हाट को भी प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया।

पशु स्वास्थ्य और चारे पर भी ध्यान

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 259 लाख गौ-भैंसवंशीय पशु हैं, जिनमें 35 प्रतिशत उन्नत नस्ल के हैं। पशुओं को हरा चारा और संतुलित आहार उपलब्ध कराने, समय पर टीकाकरण सुनिश्चित करने तथा हरे चारे की कमी पूरी करने के लिए साइलेज के उपयोग पर चर्चा हुई। राष्ट्रीय पशुधन मिशन, नस्ल सुधार, दूध समृद्धि संपर्क अभियान, कृत्रिम गर्भाधान और गोबर-गोमूत्र से जैविक खाद बनाने जैसे विषयों की भी समीक्षा की गई।

इंदौर सहकारी दूध संघ के अनुसार, उसके डेयरी संयंत्र की प्रसंस्करण क्षमता प्रतिदिन चार लाख लीटर है। संघ की नौ जिलों में 2,637 दूध समितियां हैं। यहां दूध के साथ श्वेत मक्खन और दूध का चूर्ण जैसे उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं। दूध की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए भारत सरकार की एनपीडीडी परियोजना के अंतर्गत 23 नए बल्क मिल्क कूलर स्थापित किए गए हैं।

बैठक में संभागायुक्त भास्कर लाक्षाकार, इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा, अन्य जिलों के कलेक्टर और पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

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