इंदौर भाजपा में जल संकट पर तकरार, मालिनी गौड़ बोलीं— बैठकों का कोई मतलब नहीं
पांच विधायक बैठक से नदारद, मंत्री विजयवर्गीय का तंज

इंदौर में जल संकट से निपटने की तैयारियों को लेकर नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की अध्यक्षता में 15 अक्टूबर गुरुवार को बैठक हुई। बैठक में पांच विधायकों की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बन गई। इनमें विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-4 की विधायक मालिनी गौड़, उषा ठाकुर, गोलू शुक्ला, तुलसी सिलावट और मनोज पटेल शामिल हैं। सांसद शंकर लालवानी भी बैठक में नहीं पहुंचे। बैठक में शामिल नहीं होने को लेकर सवाल उठने के बाद मालिनी गौड़ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि बार-बार समस्या उठाने के बावजूद समाधान नहीं निकलता, तो ऐसी बैठकों में जाने का क्या फायदा।
मंत्री विजयवर्गीय ने गैरमौजूद विधायकों पर कसा तंज
बैठक में महापौर पुष्यमित्र भार्गव के साथ विधायक रमेश मेंदोला, मधु वर्मा और महेंद्र हार्डिया शामिल हुए। अन्य विधायकों की अनुपस्थिति पर सवाल पूछे जाने पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, “जो विधायक नहीं आए, उनसे पूछो, मुझसे क्यों पूछते हो। शायद उनके विधानसभा क्षेत्रों में पानी की समस्या नहीं होगी, इसलिए वे नहीं आए होंगे।” उनके इस बयान के बाद बैठक से दूर रहे जनप्रतिनिधियों को लेकर चर्चा तेज हो गई।
विधायक मालिनी गौड़ ने उठाई अपने क्षेत्र की समस्या
शारदा कन्या स्कूल के एक कार्यक्रम के दौरान विधायक मालिनी गौड़ से बैठक में शामिल नहीं होने के बारे में पूछा गया। उन्होंने अपने क्षेत्र में पानी की गंभीर समस्या होने की बात कही। उनके अनुसार, कई जगह पीने के साफ पानी की कमी है और गंदे पानी की शिकायतें भी हैं। उन्होंने कहा कि वह अधिकारियों के साथ कई बैठकें कर चुकी हैं और नगरीय प्रशासन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के सामने भी मुद्दा उठा चुकी हैं, लेकिन ठोस समाधान नहीं निकला।
टंकी तैयार, बिजली कनेक्शन का इंतजार
विधायक मालिनी गौड़ ने बताया कि उनके विधानसभा क्षेत्र के गोंदवले धाम इलाके में नर्मदा जल की टंकी बनकर तैयार है, लेकिन बिजली कनेक्शन नहीं होने से उससे जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। उन्होंने नगर निगम अधिकारियों और महापौर पुष्यमित्र भार्गव के सामने भी समस्या रखी, लेकिन समाधान नहीं हुआ। इसी आधार पर उन्होंने ऐसी बैठकों की उपयोगिता पर सवाल उठाए।
जल संकट के समाधान पर निगाहें
कम बारिश के कारण आगामी महीनों में जलापूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है। बैठक में जल संसाधनों के प्रबंधन, वैकल्पिक व्यवस्था और जरूरत वाले क्षेत्रों तक पानी पहुंचाने पर चर्चा हुई थी। अब चुनौती यह है कि जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय के साथ जल संकट की आशंका वाले क्षेत्रों में समय रहते ठोस व्यवस्था की जाए।



