बेटे को खोने के दर्द में भी पंवार परिवार ने चुनी मानव सेवा की राह, पार्थ के नेत्रदान से दो लोगों को उम्मीद
11 वर्षीय बच्चे के निधन के बाद परिवार ने लिया नेत्रदान और त्वचादान का निर्णय, गंभीर रूप से झुलसे मरीजों को भी मिलेगी मदद

ग्यारह वर्षीय बेटे को खोने का दुःख किसी भी परिवार के लिए असहनीय होता है, लेकिन इसी कठिन घड़ी में इंदौर के पंवार परिवार ने ऐसा निर्णय लिया, जिससे दूसरे लोगों के जीवन में नई उम्मीद जग सकती है। मालवीय नगर निवासी रविन्द्र पंवार के पुत्र पार्थ पंवार के आकस्मिक निधन के बाद परिवार ने उनके नेत्रदान और त्वचादान का फैसला किया। परिवार की इस सहमति से पार्थ की स्मृति मानव सेवा के एक प्रेरक कार्य से जुड़ गई।
दो लोगों को मिल सकती है आंखों की रोशनी
पार्थ के नेत्रदान से दो दृष्टिहीन व्यक्तियों को नई रोशनी मिलने की उम्मीद है। वहीं, त्वचादान से गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के उपचार में सहायता मिल सकेगी। बेटे के निधन के गहरे सदमे के बीच परिवार का यह निर्णय अंगदान और ऊतकदान के महत्व को सामने लाता है। यह कदम दूसरे परिवारों को भी इस दिशा में जागरूक करने की प्रेरणा दे सकता है।
मुस्कान ग्रुप ट्रस्ट ने कराया सेवा कार्य
यह नेत्रदान और त्वचादान मुस्कान ग्रुप पारमार्थिक ट्रस्ट, इंदौर के माध्यम से संपन्न हुआ। इस कार्य के समन्वय में संजय कासलीवाल, लक्की खत्री और उमेश कुंडल ने भूमिका निभाई। तकनीकी सहयोग जीतू बगानी और निवेदिता गोयल ने प्रदान किया।
पंवार परिवार ने निजी दुःख की घड़ी में जो निर्णय लिया, वह इस बात का उदाहरण है कि किसी के जाने के बाद भी उसकी स्मृति दूसरों के जीवन में आशा का कारण बन सकती है। पार्थ के नेत्रदान से दो लोगों को दृष्टि मिलने की उम्मीद है, जबकि त्वचादान गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के उपचार में सहायक होगा।



