इंदौर : नवरात्रि में अन्नपूर्णा और बिजासन मंदिर में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़
मंदिर प्रबंधन करता है श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्था

शारदीय नवरात्रि के दौरान इंदौर के प्रमुख देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है। मां अन्नपूर्णा मंदिर और मां बिजासन माता मंदिर में दर्शन के लिए शहर के विभिन्न क्षेत्रों के साथ आसपास के इलाकों से भी बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। दोनों मंदिरों में पूजा-अर्चना के साथ भक्तिमय वातावरण रहता है। नवरात्रि के दिनों में श्रद्धालु मां के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं।
मां अन्नपूर्णा मंदिर में उमड़ते हैं भक्त
इंदौर के अन्नपूर्णा रोड पर स्थित मां अन्नपूर्णा मंदिर शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां सालभर श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां अन्नपूर्णा को अन्न और पोषण की देवी माना जाता है। भक्त मां के दर्शन कर परिवार में सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना करते हैं। नवरात्रि के दौरान मंदिर परिसर में विशेष चहल-पहल रहती है। सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है और दिनभर भक्त दर्शन के लिए आते रहते हैं।
पहाड़ी पर स्थित मां बिजासन माता मंदिर
इंदौर एयरपोर्ट के पास बिजासन टेकरी पर स्थित मां बिजासन माता मंदिर भी शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर में मां के दर्शन के लिए सालभर श्रद्धालु पहुंचते हैं। नवरात्रि के दौरान भक्तों की आवाजाही बढ़ जाती है। श्रद्धालु मां के दर्शन कर परिवार की खुशहाली, सुख-समृद्धि और जीवन में शांति की कामना करते हैं। शहर के अलग-अलग क्षेत्रों के अलावा आसपास के इलाकों से भी भक्त यहां पहुंचते हैं। नवरात्रि के दौरान मंदिर परिसर में धार्मिक गतिविधियों और पूजा-अर्चना के चलते भक्तिमय वातावरण बना रहता है।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रहती है व्यवस्था
नवरात्रि के दौरान मां अन्नपूर्णा और मां बिजासन माता मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। दर्शन के लिए आने वाले भक्तों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कतारों का संचालन, प्रवेश और निकास व्यवस्था तथा मंदिर परिसर में अनुशासन बनाए रखने पर ध्यान दिया जाता है। त्योहार के दिनों में दोनों मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है। ऐसे में व्यवस्थाओं का सुचारु संचालन जरूरी रहता है, ताकि भक्तों को आसानी से दर्शन करने का अवसर मिल सके और मंदिर परिसर में व्यवस्था बनी रहे।



