त्योहारी सीजन से विमानन क्षेत्र को संबल, हवाई यात्रियों की गिरावट थामने के संकेत
जेफरीज का अनुमान—अक्टूबर में घरेलू यातायात की सालाना गिरावट घटकर 4-5% रह सकती है, लेकिन महंगा ईंधन बना रहेगा चुनौती

त्योहारी सीजन में हवाई यात्रा की बढ़ती मांग से देश के विमानन क्षेत्र को कुछ राहत मिलने के संकेत हैं। उड़ानों की क्षमता बहाल होने और यात्रियों की आवाजाही बढ़ने के बीच अक्टूबर में घरेलू हवाई यातायात की सालाना गिरावट घटकर 4 से 5 प्रतिशत तक रहने का अनुमान है। ब्रोकरेज फर्म जेफरीज की इक्विटी रिसर्च रिपोर्ट में यह आकलन सामने आया है। हालांकि, यात्री संख्या में सुधार के बावजूद एयरलाइंस को बढ़ती परिचालन लागत से राहत मिलना फिलहाल चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
लगातार गिरावट के बाद सुधार की उम्मीद
जेफरीज के अनुसार, घरेलू हवाई यात्री यातायात में लगातार चार महीनों तक कमजोरी दर्ज होने के बाद अक्टूबर में स्थिति सुधरती दिखाई दे रही है। जुलाई से सितंबर की तिमाही में घरेलू प्रस्थान करने वाले यात्रियों की संख्या पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 6 प्रतिशत कम रही थी। अक्टूबर में अब तक यह गिरावट घटकर अनुमानित 4-5 प्रतिशत रह गई है। मासिक आधार पर भी यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी के संकेत मिले हैं।
रिपोर्ट में पिछले वर्ष के रुझान का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि 2025 में जुलाई-सितंबर की कमजोरी के बाद अक्टूबर और नवंबर में यात्री यातायात की सालाना वृद्धि दर सकारात्मक हो गई थी। हालांकि, दिसंबर में इंडिगो के उड़ान कार्यक्रम से जुड़ी समस्याओं के बीच यातायात फिर प्रभावित हुआ था।
इंडिगो और एयर इंडिया पर भी दबाव
घरेलू विमानन बाजार में पिछली तिमाही के दौरान मांग और उड़ानों की क्षमता में कमी का असर दिखाई दिया। सितंबर में इंडिगो के घरेलू यात्री यातायात में सालाना आधार पर 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि एयर इंडिया के मामले में यह कमी 9 प्रतिशत रही। भारतीय एयरलाइंस का अंतरराष्ट्रीय यात्री यातायात भी दबाव में रहा और सितंबर में इसमें 11 प्रतिशत की गिरावट आई।
महंगे जेट ईंधन से बढ़ सकती है लागत
यात्री यातायात में सुधार की संभावना के बीच विमानन कंपनियों के सामने ईंधन की बढ़ती कीमतों की चुनौती बनी हुई है। जेफरीज के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक जेट ईंधन की हाजिर कीमतें जुलाई-सितंबर तिमाही के औसत स्तर से 17 प्रतिशत ऊपर पहुंच गई हैं। इससे एयरलाइंस की परिचालन लागत पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
कमाई में सुधार की राह आसान नहीं
रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि महंगा ईंधन और विमानों का कम उपयोग एयरलाइंस की लाभप्रदता को प्रभावित कर सकते हैं। प्रति यात्री आय में सुधार होने के बावजूद लागत का दबाव कमाई पर असर डाल सकता है। इंडिगो के लिए भी ईंधन महंगाई और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच उड़ानों की क्षमता तथा टिकटों के किराये से जुड़े फैसले लेना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
जेफरीज के अनुसार, पश्चिम एशिया में संघर्ष लंबा खिंचने पर विमानन कंपनियों की कमाई पर दबाव बना रह सकता है। ऐसे में अक्टूबर के शुरुआती संकेत यात्री यातायात में गिरावट की रफ्तार धीमी होने की उम्मीद जरूर जगाते हैं, लेकिन क्षेत्र में टिकाऊ सुधार के लिए ईंधन की कीमतों और भू-राजनीतिक परिस्थितियों का अनुकूल होना भी महत्वपूर्ण रहेगा।



