निर्यात ऑर्डर ने भारतीय उद्योग को दी मजबूती, विनिर्माण पीएमआई 54.7 पर
सितंबर के मुकाबले मामूली गिरावट, फिर भी दीर्घकालिक औसत से ऊपर कायम रही औद्योगिक गतिविधियां

भारत के विनिर्माण क्षेत्र ने अक्टूबर में भी विस्तार की रफ्तार बनाए रखी। विदेशी बाजारों से बढ़ती मांग और निर्यात के नए ऑर्डर ने घरेलू कंपनियों की कारोबारी गतिविधियों को मजबूती दी। हालांकि, उत्पादन और नए कारोबार में वृद्धि की गति सितंबर की तुलना में कुछ कम रही। एचएसबीसी इंडिया का विनिर्माण क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) अक्टूबर में 54.7 दर्ज किया गया, जबकि सितंबर में यह 55.1 था। इसके बावजूद सूचकांक लगातार 50 के स्तर से ऊपर बना हुआ है, जो औद्योगिक गतिविधियों में विस्तार का संकेत है।
एसएंडपी ग्लोबल के सर्वेक्षण के अनुसार, अक्टूबर में निर्यात से जुड़े नए ऑर्डर में पिछले छह महीनों की सबसे तेज वृद्धि हुई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले कारोबार ने भारतीय विनिर्माण कंपनियों को बिक्री और उत्पादन बनाए रखने में मदद की। बांग्लादेश, कनाडा, इंडोनेशिया, नेपाल, ओमान, सऊदी अरब, श्रीलंका, ब्रिटेन, अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात से कंपनियों को नए ऑर्डर मिले।
कच्चे माल का भंडार बढ़ाने में जुटीं कंपनियां
भविष्य में आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका और वैश्विक अनिश्चितता को देखते हुए कंपनियों ने कच्चे माल का स्टॉक बढ़ाया। अक्टूबर में भंडार बढ़ाने की गति पिछले आठ महीनों में सबसे तेज रही। कंपनियों ने कर्मचारियों की संख्या में भी इजाफा किया, हालांकि नई भर्तियों की रफ्तार धीमी रही।
लागत का दबाव घटा, कारोबारी भरोसे में कमी
एचएसबीसी की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मांग में मजबूती से निर्यात ऑर्डर बढ़े और उत्पादन को समर्थन मिला। कुछ कच्चे माल तथा ऊर्जा की लागत बढ़ने के बावजूद उत्पादन सामग्री और तैयार वस्तुओं की कीमतों पर कुल दबाव पिछले महीने के मुकाबले कम हुआ। वहीं, भविष्य के कारोबार को लेकर कंपनियों का भरोसा कमजोर पड़ा। बेहतर मांग, नए ग्राहक और प्रचार अभियानों को नए ऑर्डर बढ़ने की प्रमुख वजह बताया गया।



