दीपावली पर लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की पूजा क्यों ? जानिए इस परंपरा के पीछे की कथा
धन-समृद्धि के साथ बुद्धि और विवेक का भी है विशेष महत्व

दीपावली पर माता लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस दिन घरों और प्रतिष्ठानों में दोनों देवताओं का पूजन कर सुख-समृद्धि, धन-वैभव और शुभता की कामना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में इस परंपरा को धन के साथ बुद्धि और विवेक के महत्व से भी जोड़कर देखा जाता है।
माता लक्ष्मी और गणेश जी से जुड़ी पौराणिक कथा
एक प्रचलित पौराणिक कथा के अनुसार, माता लक्ष्मी को अपने वैभव पर अभिमान हो गया था। भगवान विष्णु ने उन्हें समझाया कि धन और वैभव के साथ संतान का सुख भी महत्वपूर्ण है। इस प्रसंग में माता पार्वती ने भगवान गणेश को माता लक्ष्मी के पुत्र के रूप में स्वीकार करने की बात कही। मान्यता के अनुसार, इसके बाद माता लक्ष्मी ने गणेश जी को वरदान दिया कि उनकी पूजा के साथ भगवान गणेश का पूजन भी किया जाएगा।
इसी कथा को दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश की संयुक्त पूजा की परंपरा से जोड़कर बताया जाता है।
धन के साथ बुद्धि और विवेक का संदेश
धार्मिक मान्यताओं में माता लक्ष्मी को धन, वैभव और समृद्धि की देवी माना जाता है, जबकि भगवान गणेश बुद्धि, विवेक और शुभारंभ के प्रतीक हैं। दोनों का एक साथ पूजन इस भाव को दर्शाता है कि जीवन में केवल धन होना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उसका सही उपयोग करने के लिए समझ और विवेक भी जरूरी हैं।
दीपावली पर क्यों होती है लक्ष्मी-गणेश की पूजा?
दीपावली पर लोग अपने घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में लक्ष्मी-गणेश का पूजन कर सुख-समृद्धि, उन्नति और शुभता की कामना करते हैं। व्यापारियों के लिए भी यह पूजा विशेष महत्व रखती है। मान्यता है कि धन के साथ सद्बुद्धि और सही निर्णय लेने की क्षमता जीवन को बेहतर दिशा देती है।
इस तरह लक्ष्मी-गणेश पूजन की परंपरा केवल धन-वैभव की कामना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समृद्धि के साथ बुद्धि, विवेक और जिम्मेदारी के महत्व का संदेश भी देती है।



