दिग्विजय सिंह का बड़ा बयान, बोले- ‘मैं कभी हिंदुत्व का समर्थक नहीं रहा और न रहूंगा’
शाजापुर में सनातन और हिंदुत्व को अलग बताया, आरएसएस की विचारधारा पर भी साधा निशाना

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने हिंदुत्व और सनातन धर्म को अलग-अलग बताते हुए कहा कि वह कभी हिंदुत्व के समर्थक नहीं रहे और न भविष्य में इसका समर्थन करेंगे। सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा लेकर शाजापुर पहुंचे सिंह ने रविवार को विश्राम गृह में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बात कही। उन्होंने सनातन धर्म को सभी धर्मों के सम्मान, प्रेम और सद्भाव से जोड़ते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा पर भी सवाल उठाए।
‘सनातन धर्म में नफरत के लिए जगह नहीं’
दिग्विजय सिंह ने कहा कि सनातन धर्म का मूल उद्देश्य सभी धर्मों का सम्मान करना है। उनके मुताबिक, सनातन धर्म हजारों वर्ष पुराना है, जबकि हिंदुत्व शब्द वीर सावरकर लेकर आए थे। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में कटुता और नफरत का उल्लेख नहीं है, बल्कि सभी धर्मों में प्रेम और सद्भाव का संदेश दिया गया है। उन्होंने अपनी यात्रा का उद्देश्य भी इसी विचार को आगे बढ़ाना बताया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिंह ने कुरान पढ़ने का जिक्र करते हुए काफिर शब्द की व्याख्या पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वह 1972 से इस विषय पर अपने विचारों का पालन करते आ रहे हैं।
आरएसएस और अंग्रेजों की नीति पर लगाए आरोप
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि अंग्रेजों ने हिंदू और मुसलमानों को बांटा और कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा दिया। उन्होंने आरएसएस की विचारधारा को नफरत से जुड़ा बताते हुए कहा कि भारतीय संविधान सभी धर्मों के सम्मान की बात करता है। उनके अनुसार, संविधान और राष्ट्रीय ध्वज का विरोध भी इसी वैचारिक टकराव का हिस्सा रहा है।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनकी लड़ाई विचारधारा की है। उन्होंने महात्मा गांधी की हत्या का उल्लेख करते हुए नाथूराम गोडसे का नाम लिया और नागरिकता के अधिकारों पर भी चिंता जताई।
मंदिर में दर्शन के बाद यात्रा आगे बढ़ी
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल पर भी कटाक्ष किए। उन्होंने खुद को सनातन धर्म में विश्वास रखने वाला बताया और चंदा चोरी तथा वोट चोरी को लेकर भी टिप्पणी की।
प्रेस वार्ता के बाद दिग्विजय सिंह ने माता राजराजेश्वरी मंदिर में दर्शन किए। इसके बाद वह यात्रा के साथ पैदल शहरी हाईवे से होते हुए पनवाड़ी की ओर रवाना हुए। यात्रा का रात्रि विश्राम ग्राम जलोदा के वाटर पार्क में निर्धारित था। सोमवार को यात्रा के राजगढ़ जिले में प्रवेश करने की योजना थी।



