शराब तस्करों की गाड़ी रोकने पहुंचे TI को कुचला, इलाज के दौरान मौत
चालक की तलाश में जुटी पुलिस

मध्यप्रदेश के देवास जिले के खातेगांव में अवैध शराब तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के दौरान एक दर्दनाक घटना में थाना प्रभारी दिलीप पुरी की जान चली गई। शराब से भरे आयशर वाहन को रोकने पहुंचे टीआई को वाहन चालक ने कुचल दिया। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां करीब दो घंटे तक उपचार और सीपीआर देने के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। सोमवार 2 नवंबर को सामने आई इस घटना से पुलिस विभाग में शोक की लहर है।
तस्करी की सूचना पर बनाई गई थीं पुलिस टीमें
जानकारी के अनुसार, पुलिस को सूचना मिली थी कि हरदा की ओर से अवैध शराब से भरा वाहन इंदौर होते हुए गुजरात की तरफ जा रहा है। सूचना के आधार पर देवास पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने संदेहास्पद वाहन को पकड़ने के लिए पांच से अधिक पुलिस टीमें गठित की थीं। इनमें कन्नौद, सतवास और खातेगांव के थाना प्रभारियों सहित पुलिसकर्मी शामिल थे।
रविवार देर रात करीब डेढ़ बजे खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी अपनी टीम के साथ इंदौर-बैतूल हाईवे पर चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान संदेहास्पद आयशर वाहन को रुकवाया गया। टीआई ने चालक को नीचे उतरने के लिए कहा, लेकिन उसने वाहन आगे बढ़ाने की कोशिश की।
डिवाइडर पर चढ़ाकर भागा चालक
बताया जा रहा है कि चालक ने वाहन को डिवाइडर पर चढ़ाकर वहां से निकलने का प्रयास किया। इसी दौरान दिलीप पुरी वाहन की चपेट में आ गए और उसका पिछला पहिया उनके ऊपर से गुजर गया। गंभीर रूप से घायल टीआई को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों के प्रयास सफल नहीं हो सके।
घटना के बाद चालक वाहन लेकर आगे निकल गया और संदलपुर में उसे छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने वाहन जब्त कर लिया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, वाहन में बड़ी मात्रा में अवैध शराब छिपाकर रखी गई थी। शराब को गुप्त हिस्से में रखा गया था और उसके परिवहन का वैध परमिट भी नहीं मिला।
तस्करी के नेटवर्क की जांच के लिए एसआईटी
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा सहित वरिष्ठ अधिकारी सक्रिय हुए। मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया है। पुलिस अब शराब के स्रोत, उसके गंतव्य और इस तस्करी में शामिल लोगों की पहचान करने में जुटी है। फरार चालक की तलाश भी की जा रही है।
दिलीप पुरी वर्ष 2007 बैच के उप निरीक्षक थे। वे इंदौर के हीरानगर और चंदननगर थानों में भी पदस्थ रह चुके थे। मूल रूप से धार जिले के राजोद थाना क्षेत्र के बरमंडल गांव के निवासी पुरी के परिवार पर इस घटना से दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।



