देवास में 13 मौतों पर घमासान, जीतू पटवारी ने अफसरों को घेरा
शराब की बोतल लेकर पहुंचे कांग्रेस अध्यक्ष, प्रशासन के दावों पर उठाए सवाल

मध्यप्रदेश के देवास में 13 लोगों की मौत का मामला अब राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है। चंदाना और बिंजाना गांवों में हुई मौतों को लेकर मृतकों के परिजन शराब पीने के बाद तबीयत बिगड़ने और जान जाने के आरोप लगा रहे हैं। मामले को लेकर कांग्रेस ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
शनिवार 24 अक्टूबर को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने चंदाना गांव पहुंचकर मृतकों के परिजनों से मुलाकात की। नेताओं ने परिवारों की बात सुनी और घटना को लेकर प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि मामले में मौतों से जुड़े तथ्यों को छिपाने की कोशिश की जा रही है।
कलेक्टर कार्यालय में तीखी बहस
पीड़ित परिवारों से मुलाकात के बाद कांग्रेस नेताओं ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर प्रभारी कलेक्टर आईएएस दलीप कुमार और अपर कलेक्टर शोभाराम सोलंकी से जवाब मांगा। यहां शराब को मानव उपभोग के योग्य बताए जाने संबंधी प्रशासनिक दावे पर जीतू पटवारी ने कड़ी आपत्ति जताई।
पटवारी ने अधिकारियों से तीखे लहजे में कहा, “चलो वो बोतल आपको पिला दूं, गाड़ी में लाया हूं।” उन्होंने प्रशासन की जवाबदेही तय करने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग भी उठाई। पटवारी ने अधिकारियों को निलंबित करने की बात कही और प्रशासन पर मामले को दबाने के आरोप लगाए।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने पार्टी के जिला अध्यक्ष मनीष चौधरी से दो दिन बाद प्रदर्शन की तैयारी करने और बड़ी संख्या में लोगों को जुटाने के लिए भी कहा।
मौतों की वजह पर जांच के सवाल
मौतों का सिलसिला 27 सितंबर से 16 अक्टूबर के बीच का बताया जा रहा है। परिजनों के अनुसार, मृतकों में से 10 की मौत जहरीली शराब पीने से हुई। उनका आरोप है कि शराब पीने के बाद लोगों को उल्टियां हुईं और कुछ की आंखों की रोशनी भी चली गई। हालांकि, इन मौतों की वास्तविक वजह जांच का विषय है।
दूसरी ओर, जिला प्रशासन ने शुक्रवार रात जारी प्रेस नोट में मौतों से संबंधित दावों और आंकड़ों को भ्रामक बताया था। शनिवार को परिजनों ने फिर शराब पीने के बाद तबीयत बिगड़ने और मौत होने के आरोप लगाए।
प्रशासन के दावों और परिवारों के आरोपों के बीच अब मामले की निष्पक्ष जांच अहम हो गई है। मौतों की वास्तविक वजह और जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच के निष्कर्ष सामने आना जरूरी है।



