CM डॉ. मोहन यादव ने ग्रामीण भू-स्वामियों के लिए बदली रजिस्ट्री की तस्वीर, अब सरकार भरेगी स्टाम्प शुल्क
पट्टाधारियों को मिलेगा संपत्ति का पक्का दस्तावेज, धनतेरस पर गांवों में रजिस्ट्री पूरी कराने की जिम्मेदारी संभालेंगे जनप्रतिनिधि

मध्यप्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे भू-स्वामियों को अब अपनी जमीन या मकान की पक्की रजिस्ट्री कराने के लिए स्टाम्प शुल्क नहीं चुकाना होगा, जिनके पास संपत्ति का पट्टा है, लेकिन उसका विधिवत पंजीयन नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना के तहत पात्र भू-स्वामियों की रजिस्ट्री पर लगने वाला स्टाम्प शुल्क राज्य सरकार द्वारा जमा कराने का निर्णय लिया है। इससे पात्र लोगों को बिना अतिरिक्त आर्थिक बोझ के अपनी संपत्ति का पक्का दस्तावेज मिल सकेगा।
मुख्यमंत्री ने रविवार, 1 नवम्बर को समत्व भवन में योजना की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को पंजीयन प्रक्रिया में तेजी लाने और सभी पात्र हितग्राहियों तक इसका लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए।
मालिकाना हक के साथ बढ़ेगी आर्थिक पात्रता
मुख्यमंत्री ने कहा कि संपत्ति का पट्टा होने के बावजूद पक्की रजिस्ट्री नहीं होने से भू-स्वामियों को कई तरह की व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। विधिवत रजिस्ट्री होने से संपत्ति पर उनका मालिकाना अधिकार मजबूत होगा। साथ ही वे अपनी संपत्ति का क्रय-विक्रय करने और उसके आधार पर ऋण जैसी वित्तीय सुविधाएं प्राप्त करने के पात्र बन सकेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान निरंतर जारी रहेगा और अगले वर्ष इसे युवा वर्ष से भी जोड़ा जाएगा।
धनतेरस पर गांवों में पहुंचेंगे मंत्री, सांसद और विधायक
योजना को गति देने के लिए मुख्यमंत्री ने 6 नवम्बर को धनतेरस के अवसर पर विशेष पहल करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत सभी मंत्री, सांसद और विधायक अपने पैतृक गांव अथवा पसंद के किसी अन्य गांव में पहुंचकर पात्र भू-स्वामियों की शत-प्रतिशत रजिस्ट्री अपनी मौजूदगी में पूरी कराएंगे। जिला कलेक्टरों को प्रभारी मंत्रियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय कर यह काम सुनिश्चित करने को कहा गया है। लक्ष्य पूरा होने पर गांव में जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा।
15 नवम्बर तक 20 लाख पंजीयन का प्रयास
प्रमुख सचिव राजस्व डॉ. ई. रमेश कुमार ने बताया कि 1 नवम्बर तक प्रदेश में 12 लाख 87 हजार 252 रजिस्ट्रियों का पंजीयन पूरा हो चुका है। सरकार का प्रयास है कि 15 नवम्बर तक यह आंकड़ा 20 लाख तक पहुंचाया जाए। इसके लिए प्रदेशभर में जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
समीक्षा बैठक में मंत्री चैतन्य काश्यप, राज्यमंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल, मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल सहित मुख्यमंत्री कार्यालय और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।



