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छोटा गणपति भूमिगत मेट्रो स्टेशन का जमीनी सच, कंपन और सुरक्षा पर क्या बोले रहवासी ?

निगरानी के बीच निर्माण जारी

लेखक: कपिल माखीजा, जनशक्ति उजालास्थान: इंदौर3 मिनट पढ़ें
छोटा गणपति भूमिगत मेट्रो स्टेशन का जमीनी सच, कंपन और सुरक्षा पर क्या बोले रहवासी ?
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इंदौर के छोटा गणपति क्षेत्र में भूमिगत मेट्रो स्टेशन का निर्माण गहरी खुदाई और चट्टानों की कटाई के बीच आगे बढ़ रहा है। निर्माण के दौरान तेज आवाज और कंपन को लेकर स्थानीय रहवासियों एवं व्यापारियों ने चिंता जताई थी। जमीनी स्थिति जानने के लिए निर्माण स्थल के आसपास रहने वाले लोगों, धर्मशाला ट्रस्ट और मेट्रो प्रबंधन से बातचीत की गई। लोगों के अनुभवों में जहां कुछ ने सुरक्षा इंतजामों पर संतोष जताया, वहीं स्टेशन के अलाइनमेंट और पुराने भवनों की सुरक्षा को लेकर सवाल भी उठाए।

रहवासी बोले, मकान में नहीं आई दरार

स्टेशन से करीब पांच मीटर दूर रहने वाले हिमांशु शास्त्री ने बताया कि शुरुआत में दो पाइलिंग मशीनें एक साथ चलने से कंपन महसूस हुआ था। पास के बोरिंग के पानी की गुणवत्ता प्रभावित होने की शिकायत के बाद मेट्रो टीम ने जांच कर स्वच्छ पानी की व्यवस्था करवाई। उनके मुताबिक, अब तक उनके मकान में कंपन से कोई दरार या क्षति दिखाई नहीं दी है। उन्होंने बताया कि कंपन की निगरानी के लिए नीदरलैंड की ओमनीडॉट स्वार्म मशीनें लगाई गई हैं, जो निर्माण के दौरान कंपन मापने में मदद करती हैं।

धर्मशाला ट्रस्ट ने जताया संतोष, व्यापारी ने उठाए सवाल

फतेहपुरिया समाज धर्मशाला ट्रस्ट के सदस्य सज्जन कुमार गर्ग ने बताया कि मेट्रो निर्माण से धर्मशाला को अब तक कोई नुकसान नहीं हुआ है और समाज निर्माण कार्य में सहयोग कर रहा है। उन्होंने मौजूदा सुरक्षा इंतजामों पर संतोष जताया। दूसरी ओर, होटल गिरी शंकरा के संचालक शेखर गिरी ने स्टेशन के अलाइनमेंट और गहराई को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना है कि पहले सुभाष मार्ग पर स्टेशन का दूसरा विकल्प प्रस्तावित था, जिससे लागत में बचत हो सकती थी। उन्होंने जूना पीठा, तंबोली बाखल, मोदी जी की नसिया और बड़ा गणपति जैसे पुराने इलाकों की इमारतों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। उनके मुताबिक, पाइलिंग के दौरान तेज आवाज से बुजुर्गों और महिलाओं को परेशानी हुई, हालांकि उनकी होटल की इमारत में अब तक कोई दरार दिखाई नहीं दी है।

स्टेशन मैनेजर ने बताई सुरक्षा व्यवस्था

निर्माणाधीन छोटा गणपति भूमिगत मेट्रो स्टेशन के स्टेशन मैनेजर शशिकांत भारती ने बताया कि निर्माण शुरू होने से पहले आसपास के भवनों का बिल्डिंग कंडीशन सर्वे (बीसीएस) किया गया था। इसके तहत भवनों की तस्वीरें लेकर रिपोर्ट तैयार की गई और रहवासियों को सौंपी गई। उन्होंने कहा कि विशेष मशीनों के माध्यम से कंपन की निगरानी की जा रही है। भारती के अनुसार, निर्माण स्थल के पास वर्ष 1959 में बनी इमारत के आसपास पाइलिंग का काम पूरा हो चुका है। वहां निर्धारित पांच मिलीमीटर की सीमा के मुकाबले करीब एक मिलीमीटर कंपन दर्ज होने की बात उन्होंने कही। उन्होंने बताया कि मुख्य पाइलिंग का काम 15 नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसके बाद निर्माण का अधिकांश काम भूमिगत होने से आसपास शोर कम होने की उम्मीद है।

आधुनिक तकनीक और सुरक्षा निगरानी के बीच निर्माण

छोटा गणपति क्षेत्र में भूमिगत मेट्रो स्टेशन का निर्माण आधुनिक तकनीक और सुरक्षा निगरानी के बीच आगे बढ़ रहा है। भवनों का पूर्व सर्वेक्षण, कंपन मापने वाली मशीनों की व्यवस्था और स्थानीय लोगों से संवाद निर्माण के दौरान सावधानी बरतने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। मेट्रो प्रबंधन को उम्मीद है कि मुख्य पाइलिंग का काम पूरा होने के बाद आसपास शोर में कमी आएगी और परियोजना का अगला चरण आगे बढ़ेगा।

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