अमेरिकी चुनाव में ट्रंप को झटका, 30 भारतीय मूल के उम्मीदवार जीते; कई राज्यों में बढ़ा सियासी दबदबा
कांग्रेस पर डेमोक्रेट्स के नियंत्रण से राष्ट्रपति की मुश्किलें बढ़ीं, व्हाइट हाउस की नीतियों में बदलाव की मांग तेज

अमेरिका के मध्यावधि चुनाव ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राजनीतिक स्थिति को चुनौती दी है। रिपब्लिकन पार्टी को मिली हार और कांग्रेस पर डेमोक्रेटिक पार्टी के नियंत्रण के बाद ट्रंप प्रशासन पर नीतियों में बदलाव का दबाव बढ़ गया है। दूसरी ओर, इन चुनावों में भारतीय मूल के उम्मीदवारों ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों की सूची में शामिल 41 राज्य स्तरीय प्रत्याशियों में से 30 ने जीत दर्ज की, जबकि दो उम्मीदवार मतगणना में बढ़त बनाए हुए थे। इस प्रदर्शन ने अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल के नेताओं की बढ़ती भागीदारी को फिर चर्चा में ला दिया है।
ट्रंप की नीतियों पर पार्टी के भीतर सवाल
चुनावी नतीजों के बाद रिपब्लिकन नेताओं और राजनीतिक रणनीतिकारों ने व्हाइट हाउस में फेरबदल, प्रशासनिक अनुशासन और प्रमुख नीतियों की समीक्षा की मांग उठाई है। ईरान युद्ध और टैरिफ नीति को लेकर भी पार्टी के भीतर असंतोष सामने आया है। रिपब्लिकन रणनीतिकार जॉन फीहेरी ने परिणामों को ट्रंप के लिए बड़ी राजनीतिक आपदा बताते हुए उनकी टीम में बदलाव की जरूरत जताई। हालांकि ट्रंप ने चुनावी नतीजों को अपने खिलाफ जनादेश मानने से इनकार किया है।
कांग्रेस में डेमोक्रेट्स की बढ़त से बढ़ेंगी चुनौतियां
कांग्रेस पर डेमोक्रेटिक पार्टी के नियंत्रण से राष्ट्रपति प्रशासन के लिए विधायी प्रस्तावों को आगे बढ़ाना कठिन हो सकता है। विपक्ष को सरकारी कामकाज की जांच करने और प्रशासनिक नियुक्तियों पर सवाल उठाने का अवसर मिलेगा। इससे ट्रंप की नीतियों को लागू करने की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है। रिपब्लिकन खेमे में यह चिंता भी है कि मौजूदा रुख जारी रहने पर 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में पार्टी को दोबारा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
ईरान युद्ध और टैरिफ बने चुनावी बहस का मुद्दा
ट्रंप ने स्वीकार किया कि आठ महीने से जारी ईरान युद्ध का रिपब्लिकन उम्मीदवारों के प्रदर्शन पर असर पड़ा, लेकिन उन्होंने सैन्य संघर्ष शुरू करने के अपने फैसले का बचाव किया। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी ईरान युद्ध को चुनावी नुकसान का एक कारण बताया। चुनाव के बाद व्हाइट हाउस ने ट्रंप के राष्ट्रपति पद पर बने रहने का संदेश देते हुए सार्वजनिक रूप से सख्त रुख दिखाया।
भारतीय मूल के 30 उम्मीदवारों को मिली जीत
इन चुनावों में भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों का प्रदर्शन खासा उल्लेखनीय रहा। मिशिगन में रंजीव पुरी और एरिजोना में प्रिया सुंदरेशन ने दोबारा जीत दर्ज की। दोनों राज्यों में डेमोक्रेट्स को विधायी सदनों में बढ़त मिलने से भारतीय मूल के इन नेताओं की राजनीतिक भूमिका मजबूत हुई है। एरिजोना में डेमोक्रेट्स ने दोनों सदनों पर नियंत्रण हासिल किया।
जॉर्जिया में ज्योत सिंह ने लगभग 68 प्रतिशत मतों के साथ जीत दर्ज की। उन्हें राज्य विधानमंडल के लिए चुने जाने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी और सिख-अमेरिकी के रूप में बताया गया है। टेक्सास में पूजा सेठी ने करीब 63 प्रतिशत मत हासिल कर जीत दर्ज की। उन्होंने राज्य विधानमंडल के लिए चुनी जाने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी महिला और पहली एशियाई-अमेरिकी डेमोक्रेटिक महिला होने का दावा किया।
कई राज्यों में भारतीय-अमेरिकी नेताओं की मजबूत मौजूदगी
इलिनोइस में नबीला सैयद ने रिपब्लिकन उम्मीदवार को हराकर सीनेट सीट डेमोक्रेट्स के खाते में डाली। राम विलिवालम, सबा हैदर और ऐश कालरा सहित कई अन्य भारतीय मूल के उम्मीदवारों ने भी जीत हासिल की। न्यूयॉर्क, कैलिफोर्निया, वॉशिंगटन, नॉर्थ कैरोलिना, ओहायो और विस्कॉन्सिन में भी भारतीय-अमेरिकी प्रत्याशियों ने सफलता दर्ज की। कई मौजूदा विधायकों ने अपनी सीटें बरकरार रखीं, जबकि कुछ उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए।
नित्या रमन की बढ़त, विवेक रामास्वामी को हार
लॉस एंजिलिस के मेयर चुनाव में नित्या रमन मतगणना के दौरान मौजूदा मेयर करेन बैस से आगे चल रही थीं। हालांकि मुकाबले का अंतिम परिणाम घोषित नहीं हुआ था। वहीं ओहायो के गवर्नर चुनाव में भारतीय मूल के विवेक रामास्वामी को डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन के हाथों हार का सामना करना पड़ा। न्यूयॉर्क में सरिता कोमाटिरेड्डी भी अटॉर्नी जनरल का चुनाव नहीं जीत सकीं।
2028 की राजनीति के लिए भी अहम संकेत
भारतीय-अमेरिकी संगठन इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट और चुनावी आंकड़ों में सामने आए परिणामों ने स्थानीय से लेकर राज्य स्तर तक भारतीय मूल के नेताओं की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी को रेखांकित किया है। 41 राज्य स्तरीय उम्मीदवारों में 30 की जीत, दो की बढ़त और नौ की हार दर्ज की गई। विजेताओं में 15 महिलाएं शामिल थीं और आठ उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए।
इन नतीजों ने अमेरिकी राजनीति में दो महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं। एक ओर ट्रंप प्रशासन को अपने राजनीतिक और नीतिगत रुख पर पुनर्विचार का दबाव झेलना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर भारतीय मूल के नेताओं की चुनावी सफलता ने अमेरिकी लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनकी बढ़ती हिस्सेदारी को सामने रखा है। आने वाले समय में कांग्रेस और राज्यों की विधानसभाओं में यह प्रतिनिधित्व अमेरिकी राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।



