लिथियम-निकेल के लिए विदेशों पर निर्भरता घटाएगा भारत, 2,814 करोड़ की योजना को कैबिनेट मंजूरी
पीएम मोदी बोले- भविष्य की तकनीकें विकसित करने में सक्षम बनेगा देश, पांच साल में स्थापित होंगे महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण संयंत्र

भारत को महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए 2,814 करोड़ रुपये की पूंजीगत व्यय सहायता योजना को मंजूरी दी है। पांच वर्षों तक लागू रहने वाली इस योजना का उद्देश्य लिथियम, निकेल और कोबाल्ट जैसे खनिजों के प्रसंस्करण की घरेलू क्षमता विकसित करना और विदेशों से तैयार सामग्री के आयात पर निर्भरता कम करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस फैसले को भविष्य की तकनीकों के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया है।
ईवी और रक्षा क्षेत्र को मिलेगा लाभ
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि लिथियम, निकेल और कोबाल्ट जैसे खनिज इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्र के लिए बेहद जरूरी हैं। इसके बावजूद भारत को इनके परिष्कृत उत्पादों के आयात पर काफी निर्भर रहना पड़ता है। नई योजना इस निर्भरता को कम करने और देश में प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने में मदद करेगी।
नए संयंत्रों की स्थापना पर मिलेगा प्रोत्साहन
योजना के तहत महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने और उन्हें परिचालन में लाने के लिए लक्षित पूंजीगत सहायता दी जाएगी। इसका उद्देश्य घरेलू निवेश को प्रोत्साहित करना, देश के भीतर मूल्य संवर्धन बढ़ाना और महत्वपूर्ण खनिजों की मजबूत आपूर्ति श्रृंखला तैयार करना है।
लिथियम और निकेल के प्रसंस्करण पर जोर
इस योजना में लिथियम और निकेल के अयस्कों तथा मध्यवर्ती उत्पादों को उच्च शुद्धता वाले यौगिकों में बदलने की क्षमता विकसित करने पर ध्यान दिया जाएगा। निकेल के उत्पादन के दौरान उप-उत्पाद के रूप में कोबाल्ट प्राप्त होने की भी उम्मीद है। इससे देश में इन महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता और प्रसंस्करण को मजबूती मिलेगी।
भविष्य के उद्योगों के लिए अहम कदम
सरकार की इस पहल से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS), इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा और विशेष इस्पात जैसे क्षेत्रों को लाभ मिलने की संभावना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को भविष्य की तकनीकों के विकास के लिए जरूरी क्षमताएं अपने देश में ही तैयार करनी होंगी। योजना इसी दिशा में घरेलू औद्योगिक आधार और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर केंद्रित है।



