दुष्कर्म और POCSO मामलों के निपटारे के लिए बढ़ेंगी फास्ट ट्रैक अदालतें, देशभर में 850 कोर्ट बनाने की तैयारी
केंद्र सरकार ने पांच साल के लिए योजना को दी मंजूरी, 3,788 करोड़ रुपये होंगे खर्च; लंबित मामलों को तेजी से निपटाने पर जोर

दुष्कर्म और बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामलों में पीड़ितों को जल्द न्याय दिलाने के लिए केंद्र सरकार न्यायिक व्यवस्था का विस्तार करने जा रही है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) योजना को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने की मंजूरी दी है। इसके तहत देश में विशेष अदालतों की संख्या मौजूदा 779 से बढ़ाकर 850 करने की तैयारी है। इस योजना पर वर्ष 2026 से 2031 के बीच 3,788.04 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
पांच साल तक जारी रहेगी योजना
योजना की नई अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निर्धारित की गई है। कुल बजट में केंद्र सरकार 2,353.15 करोड़ रुपये और राज्य तथा केंद्रशासित प्रदेश 1,434.89 करोड़ रुपये का योगदान देंगे। केंद्र का हिस्सा निर्भया फंड से उपलब्ध कराया जाएगा।
हर अदालत में होगी विशेष व्यवस्था
प्रस्तावित विस्तार के तहत फास्ट ट्रैक अदालतों में विशेष POCSO कोर्ट भी शामिल होंगी। प्रत्येक अदालत में एक न्यायिक अधिकारी, एक विशेष लोक अभियोजक और छह सहायक कर्मचारी नियुक्त किए जाएंगे। इसका उद्देश्य सुनवाई की प्रक्रिया को गति देना और लंबित मामलों का समयबद्ध निपटारा करना है।
पीड़ितों के अनुकूल बनाया जाएगा न्यायिक माहौल
योजना में बच्चों के अनुकूल अदालतों और संवेदनशील गवाहों के बयान दर्ज करने के लिए विशेष केंद्र विकसित करने पर भी ध्यान दिया जाएगा। इससे यौन अपराधों से प्रभावित बच्चों और महिलाओं को न्यायिक प्रक्रिया के दौरान बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
अधिक लंबित मामलों वाले जिलों को प्राथमिकता
नई अदालतों की स्थापना उन जिलों में प्राथमिकता से की जाएगी, जहां दुष्कर्म और POCSO मामलों का बैकलॉग अधिक है। न्याय विभाग राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन के साथ मिलकर योजना लागू करेगा। अदालतों के कामकाज और मामलों के निपटारे की निगरानी डिजिटल डैशबोर्ड, प्रगति रिपोर्ट और उच्च न्यायालयों के साथ समीक्षा बैठकों के जरिए की जाएगी।
अब तक चार लाख से अधिक मामलों का निपटारा
यह योजना 2 अक्टूबर 2019 को शुरू हुई थी। फिलहाल 29 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 779 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट काम कर रही हैं। इनमें 399 विशेष POCSO अदालतें शामिल हैं। योजना के तहत अब तक 4,02,457 मामलों का निपटारा किया जा चुका है। इसकी शुरुआत आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2018 और 25 जुलाई 2019 को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में हुई थी। पहले इसे एक वर्ष के लिए लागू किया गया था, बाद में 31 मार्च 2026 तक विस्तार दिया गया। अब अगले पांच वर्षों के लिए इसकी निरंतरता सुनिश्चित की गई है।



