हिंद-प्रशांत में समुद्री सुरक्षा पर भारत का जोर, राजनाथ सिंह बोले- सहयोग और भरोसे से बनेगी मजबूत व्यवस्था
रक्षा मंत्री ने कहा- समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता जरूरी, तकनीक का लाभ सभी देशों तक पहुंचना चाहिए

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती समुद्री चुनौतियों के बीच भारत ने खुली, समावेशी और अंतरराष्ट्रीय नियमों पर आधारित समुद्री व्यवस्था की पैरवी की है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इस क्षेत्र का भविष्य केवल तकनीकी प्रगति से निर्धारित नहीं होगा, बल्कि देशों के बीच सहयोग, आपसी विश्वास और तकनीक के जिम्मेदार इस्तेमाल पर भी निर्भर करेगा। भारत शांतिपूर्ण, सुरक्षित और समृद्ध समुद्री क्षेत्र के निर्माण में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह बात ‘इंडो पैसिफिक रीजनल डायलॉग-2026’ के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए कही।
समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता पर चिंता
रक्षा मंत्री ने कहा कि वैश्विक समुद्री सुरक्षा के सामने व्यापारिक व्यवधान और समुद्री रास्तों पर बढ़ती चुनौतियां गंभीर चिंता का विषय हैं। संकरे समुद्री मार्गों का दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे हालात में वैश्वीकरण से पीछे हटना समाधान नहीं है। इसके बजाय आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाकर अंतरराष्ट्रीय व्यापार को अधिक सुरक्षित बनाना होगा।
भारत की समुद्री भूमिका का व्यापक दायरा
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत का समुद्र से संबंध सदियों पुराना है। भारतीय नाविक समुद्री रास्तों के जरिए व्यापार के साथ ज्ञान, संस्कृति और मानवीय संबंधों का भी विस्तार करते रहे हैं। भारत की समुद्री जिम्मेदारियां केवल उसकी तटरेखा तक सीमित नहीं हैं। देश हमेशा स्वतंत्र और नियम आधारित समुद्री व्यवस्था का समर्थक रहा है।
तकनीक के साथ समान अवसर भी जरूरी
उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वचालित प्रणालियां, आधुनिक सेंसर और डेटा विश्लेषण समुद्री निगरानी, सुरक्षा और आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा दे रहे हैं। सामग्री विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी में प्रगति से भी नए अवसर खुल रहे हैं। हालांकि, तकनीकी विकास का लाभ कुछ देशों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। क्षेत्र के सभी देशों को अपनी क्षमताओं के अनुरूप इसमें भागीदारी का अवसर मिलना जरूरी है।
2047 के विजन में समुद्री क्षेत्र की अहमियत
रक्षा मंत्री ने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य में समुद्री क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। भारत केवल व्यापार और नौसैनिक क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक व्यापक समुद्री तंत्र विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित हिंद-प्रशांत महासागर पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके सात परस्पर जुड़े क्षेत्र समुद्री सहयोग के लिए व्यावहारिक आधार उपलब्ध कराते हैं।
समुद्री अमृत काल विजन से मिलेगी दिशा
राजनाथ सिंह ने भारत के समुद्री अमृत काल विजन-2047 को इस दिशा में महत्वपूर्ण बताया। इसमें तकनीक, नवाचार, अनुसंधान, शिक्षा और कौशल विकास को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत में साझा चुनौतियों का समाधान केवल संवाद से नहीं, बल्कि संयुक्त तकनीकी और परिचालन प्रयासों से संभव होगा।



