यूपी चुनाव 2027 में कांग्रेस का मध्यप्रदेश पर दांव, सचिन यादव को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी
तीन बार के विधायक को चुनावी वॉर रूम की कमान, दूसरे राज्यों के लिए भी नियुक्त किए गए प्रभारी

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों में कांग्रेस ने संगठनात्मक स्तर पर कदम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। पार्टी ने मध्यप्रदेश के कसरावद से विधायक सचिन यादव को यूपी चुनाव के वॉर रूम का चेयरपर्सन नियुक्त किया है। इस जिम्मेदारी के तहत वह चुनाव से जुड़ी गतिविधियों के संचालन, प्रचार अभियान और संगठन की विभिन्न टीमों के बीच तालमेल बनाने में भूमिका निभाएंगे। दूसरे राज्यों के लिए भी कांग्रेस ने वॉर रूम की जिम्मेदारियां तय की हैं।
चुनावी तैयारियों को व्यवस्थित करने पर जोर
उत्तर प्रदेश में मार्च 2027 में विधानसभा चुनाव संभावित हैं। इसे देखते हुए राजनीतिक दल संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति तैयार करने में जुटे हैं। कांग्रेस ने भी अपनी तैयारियों को गति देने के लिए सचिन यादव को अहम जिम्मेदारी दी है।
चुनावी वॉर रूम के जरिए सूचनाओं के आदान-प्रदान, प्रचार से जुड़े कामकाज और अलग-अलग टीमों के बीच समन्वय पर ध्यान दिया जाएगा। पार्टी की कोशिश चुनावी गतिविधियों को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने की है।
चार अन्य राज्यों में भी नियुक्तियां
कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश के अलावा पंजाब, गोवा, मणिपुर और उत्तराखंड के लिए भी वॉर रूम की जिम्मेदारियां तय की हैं। पंजाब में कन्नन गोपीनाथन, गोवा में इमरोज खान, मणिपुर में विश्वरंजन मोहंती और उत्तराखंड में कृष्ण सातरोड को यह जिम्मेदारी दी गई है।
इन नियुक्तियों के जरिए पार्टी अलग-अलग राज्यों में चुनाव से जुड़े कामकाज और संगठनात्मक समन्वय को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
तीन बार विधायक चुने जा चुके हैं सचिन यादव
सचिन यादव मध्यप्रदेश के खरगोन जिले की कसरावद विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनका जन्म 10 जनवरी 1982 को हुआ था। उनके पिता सुभाष यादव मध्यप्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं।
सचिन यादव ने 2013 में पहली बार कसरावद सीट से विधानसभा चुनाव जीता था। इसके बाद 2018 और 2023 के चुनावों में भी उन्होंने जीत दर्ज की। इस तरह वह लगातार तीन बार विधायक चुने गए। कमलनाथ सरकार में वह कृषि से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
अब उत्तर प्रदेश के चुनावी वॉर रूम की कमान मिलने के बाद उनकी भूमिका मध्यप्रदेश से बाहर कांग्रेस की चुनावी तैयारियों से भी जुड़ गई है।



