असम में दूध उत्पादन बढ़ाने की बड़ी तैयारी, रोजाना 10 लाख लीटर का लक्ष्य
डेयरी किसानों को सीधे मिलेगी सब्सिडी, सोनितपुर में शुरू हुआ 20 हजार लीटर क्षमता वाला प्रोसेसिंग प्लांट

असम सरकार राज्य में डेयरी क्षेत्र को नई मजबूती देने और दूध उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में काम कर रही है। सरकार ने प्रतिदिन 10 लाख लीटर दूध उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए डेयरी किसानों को सीधे सब्सिडी देने के साथ दूध के प्रसंस्करण और वितरण से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को राज्य सरकार की इस योजना की जानकारी दी।
किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि मजबूत डेयरी क्षेत्र से लोगों के पोषण स्तर में सुधार होगा। साथ ही किसानों की आजीविका को स्थिरता मिलेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्राप्त होगी। उन्होंने इन प्रयासों को आत्मनिर्भर असम के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
मुख्यमंत्री के अनुसार, असम में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता राष्ट्रीय औसत से कम है। इस अंतर को घटाने के लिए राज्य में दूध उत्पादन बढ़ाने और डेयरी आपूर्ति व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से डेयरी किसानों को दूध पर सीधे सब्सिडी देने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि उन्हें उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिल सके।
प्रोसेसिंग सुविधाओं का होगा विस्तार
राज्य सरकार पूरे असम में बड़े दूध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने की योजना पर भी काम कर रही है। इससे दूध के संग्रहण, प्रसंस्करण और रखरखाव की क्षमता बढ़ेगी। साथ ही संगठित डेयरी कारोबार को विस्तार देने और उपभोक्ताओं तक प्रसंस्कृत दूध की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
इस दिशा में सोनितपुर जिले में प्रतिदिन 20 हजार लीटर दूध प्रसंस्करण क्षमता वाला संयंत्र शुरू किया गया है। सरकार का मानना है कि ऐसी सुविधाओं के विस्तार से स्थानीय स्तर पर दूध की मांग और उत्पादन के बीच अंतर कम करने में मदद मिलेगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा
दूध उत्पादन का लक्ष्य हासिल करने के लिए संग्रहण, प्रसंस्करण और वितरण नेटवर्क को मजबूत करना अहम होगा। सरकार की योजना से डेयरी गतिविधियों में किसानों की भागीदारी बढ़ने, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर तैयार होने और किसान परिवारों की आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि इन पहलों से पोषण, किसानों की आजीविका और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।



