चक्रवात ‘मुरासु’ का असर: सीएम चंद्रबाबू नायडू ने प्रभावित जिलों का किया हवाई सर्वेक्षण
जलभराव दूर करने और यातायात सुचारू रखने के निर्देश, सूखे से जूझ रहे किसानों के लिए केंद्र से मांगी अतिरिक्त मदद

आंध्र प्रदेश में चक्रवात ‘मुरासु’ और सूखे की दोहरी चुनौती के बीच मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने बुधवार को प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण कर राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को जलभराव की समस्या का तत्काल समाधान करने और सड़कों पर यातायात बाधित नहीं होने देने के निर्देश दिए। दूसरी ओर, राज्य के सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए केंद्र से अतिरिक्त सहायता की मांग भी उठाई।
पांच क्षेत्रों में जलभराव पर तत्काल कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने गुंटूर, बापटला और प्रकाशम जिलों का हवाई निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने करमचेडु, कोथापटनम, चिराला, चिलकलुरिपेट और पारचुर में जलभराव दूर करने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा। बाद में आरटीजीएस में आयोजित समीक्षा बैठक में जिला कलेक्टरों को सड़क यातायात सुचारू बनाए रखने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने एलुरु के आदिवासी इलाकों में लगातार बारिश और कुछ छोटे सिंचाई टैंकों के ओवरफ्लो होने की जानकारी भी दी।
सूखे की स्थिति पर केंद्रीय टीम से चर्चा
इसी बीच राज्य में सूखे का आकलन करने पहुंची अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। टीम के दो समूहों ने 2 और 3 नवंबर को कुरनूल, नंद्याल, अनंतपुर और श्री सत्य साईं जिलों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया था। सदस्यों ने अपने आकलन के निष्कर्ष मुख्यमंत्री के सामने रखे।
21 जिलों के 388 मंडल सूखा प्रभावित
नायडू ने बताया कि कम बारिश और अल नीनो के प्रभाव से रायलसीमा सहित कई क्षेत्रों में खरीफ की फसलें प्रभावित हुई हैं। अनंतपुर में देश की दूसरी सबसे कम बारिश दर्ज की गई है। राज्य सरकार ने 21 जिलों के 388 मंडलों को सूखा प्रभावित घोषित किया है। किसानों के नुकसान का आकलन कर केंद्र से सहायता मांगी गई है। एक सप्ताह के भीतर केंद्र को विस्तृत रिपोर्ट भी सौंपी जाएगी।
मनरेगा में 200 दिन काम की मांग
मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए वीबी-जी राम जी योजना के तहत न्यूनतम रोजगार अवधि बढ़ाकर 200 दिन करने और कृषि कार्यों में इसके उपयोग की अनुमति देने का आग्रह किया। उनका कहना है कि इससे कृषि मजदूरों की कमी दूर करने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ सकेंगे।



