टाटा समूह के विवाद पर राहुल गांधी ने मोदी सरकार को घेरा
चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर विवाद के बीच कारोबारी जगत की चुप्पी पर उठाए सवाल

टाटा समूह में नेतृत्व और कंपनी के कामकाज को लेकर उभरे मतभेद अब राजनीतिक बहस का विषय बन गए हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस विवाद को लेकर मोदी सरकार को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि टाटा समूह को आपराधिक तरीके से बर्बाद किया जा रहा है और कारोबारी जगत के प्रमुख लोग इसके खिलाफ आवाज उठाने से बच रहे हैं।
राहुल गांधी ने कारोबारियों की चुप्पी पर उठाए सवाल
राहुल गांधी ने बुधवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर कहा कि भारतीय कारोबार किसी राजनीतिक नेतृत्व का खिलौना नहीं है। उन्होंने कारोबारी नेताओं से सवाल किया कि वे आखिर कब तक चुप रहेंगे। राहुल गांधी ने कहा कि उनमें साहस की कमी हो सकती है, लेकिन उनमें ऐसा नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि इन मामलों में समय आने पर न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।
टाटा संस के अध्यक्ष की नियुक्ति पर विवाद
इस पूरे मामले की प्रमुख वजह टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के अध्यक्ष एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का प्रस्ताव है। टाटा समूह की सबसे बड़ी शेयरधारक टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष नोएल टाटा ने इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
टाटा संस के निदेशक मंडल की 17 सितंबर को हुई बैठक में चंद्रशेखरन को दोबारा अध्यक्ष नियुक्त करने का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके तहत उन्हें 21 फरवरी 2027 से अगले पांच वर्षों के लिए फिर से जिम्मेदारी सौंपने का प्रस्ताव है।
प्रक्रिया और हितों के टकराव पर उठाई आपत्ति
नोएल टाटा ने कंपनी सचिव सुप्रकाश मुखोपाध्याय को पत्र लिखकर नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि फैसले में प्रक्रियागत खामियां रहीं और संभावित हितों के टकराव से जुड़े मुद्दों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने सात दिनों के भीतर संबंधित दस्तावेज और जरूरी जानकारियां उपलब्ध कराने की मांग की है। नोएल टाटा का कहना है कि इस प्रस्ताव को वैध नहीं माना जा सकता।
टाटा संस की प्रतिक्रिया का इंतजार
टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच नेतृत्व, कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की संभावना और प्रशासनिक कामकाज को लेकर मतभेद सामने आए हैं। इस घटनाक्रम ने कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जुड़े सवालों को चर्चा में ला दिया है। फिलहाल टाटा संस की ओर से इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।



