विकास की रफ्तार के लिए कैपेक्स जारी रहेगा, खर्च में अनुशासन भी जरूरी : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
निजी निवेश को गति मिलने तक सरकारी पूंजीगत व्यय पर रहेगा जोर, वित्तीय समावेशन के अगले चरण में ऋण, बीमा और पेंशन प्राथमिकता

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि देश की आर्थिक विकास दर को बनाए रखने के लिए सरकार पूंजीगत व्यय यानी कैपेक्स को प्राथमिकता देती रहेगी। हालांकि, विकास और कल्याणकारी योजनाओं के लिए खर्च बढ़ाने के साथ वित्तीय अनुशासन बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। HSBC इंडिया के तीसरे वार्षिक वित्तीय समावेशन सम्मेलन में बैंक के सीईओ हितेंद्र दवे के साथ चर्चा के दौरान उन्होंने सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं और भविष्य की योजनाओं पर विचार रखे।
कैपेक्स से विकास को मिलेगा समर्थन
सीतारमण ने कहा कि बीते चार-पांच वर्षों में पूंजीगत व्यय का सकारात्मक गुणक प्रभाव देखने को मिला है। यह सरकार की विकास रणनीति का अहम हिस्सा बना रहेगा। उनके मुताबिक, जब तक निजी क्षेत्र अपनी मौजूदा क्षमता बढ़ाने या नई उत्पादन क्षमता स्थापित करने के लिए पर्याप्त रूप से आगे नहीं आता, तब तक सरकार को निवेश जारी रखना होगा। इससे विकास की गति बनाए रखने में मदद मिलेगी।
राजकोषीय संतुलन पर भी नजर
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकारी निवेश के साथ राजकोषीय घाटे पर भी कड़ी निगरानी रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि आर्थिक विस्तार और सार्वजनिक खर्च को बनाए रखने के लिए वित्तीय समझदारी जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार वित्तीय अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता देती रहेगी।
कल्याणकारी योजनाओं से गरीबी में कमी
उन्होंने खाद्य सुरक्षा, आवास, स्वच्छता, पेयजल और स्वास्थ्य बीमा से जुड़ी योजनाओं को आम लोगों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण बताया। विश्व बैंक की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में गरीबी का स्तर पहले लगभग 25 प्रतिशत था, जो वित्त वर्ष 2023 के अंत तक घटकर करीब 2 प्रतिशत रह गया। इस बदलाव में कल्याणकारी योजनाओं, वित्तीय समावेशन और आवश्यक सेवाओं की पहुंच की भूमिका रही है।
ऋण, बीमा और पेंशन पर जोर
वित्तीय समावेशन के अगले चरण में ऋण, बीमा और पेंशन को महत्वपूर्ण बताते हुए सीतारमण ने 2047 तक सभी के लिए बीमा कवरेज का लक्ष्य दोहराया। उन्होंने कहा कि कारोबार शुरू करने या उसका विस्तार करने के इच्छुक लोगों के लिए ऋण तक पहुंच जरूरी है।
एआई प्रशिक्षण और बैंकिंग सुधार
युवाओं को रोजगार के नए अवसरों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से उन्होंने हर जिले में एआई प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की सरकार की मंशा बताई। इससे उद्योगों की जरूरतों और स्नातकों के कौशल के बीच अंतर कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने बैंकिंग प्रणाली की जरूरतों पर सुझाव देने के लिए गठित उच्च-स्तरीय समिति का भी उल्लेख किया, जो उद्योग और विशेषज्ञों से परामर्श करेगी।



