दिल्ली में जन्मीं, फिर भी यूपी से दिल का रिश्ता… ‘मिर्जापुर’ की गोलू गुप्ता ने बताया लखनऊ क्यों है खास
नाना के पांच रुपये से चिकनकारी तक, श्वेता त्रिपाठी ने साझा कीं बचपन की यादें

वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ में गोलू गुप्ता के किरदार से पहचान बनाने वाली अभिनेत्री श्वेता त्रिपाठी का उत्तर प्रदेश से गहरा जुड़ाव है। दिल्ली में जन्मीं श्वेता खुद को उत्तर प्रदेश की बेटी मानती हैं। हाल ही में लखनऊ पहुंचीं अभिनेत्री ने अपने परिवार, बचपन की यादों और शहर से जुड़े भावनात्मक रिश्ते के बारे में बात की। उनके लिए लखनऊ महज एक शहर नहीं, बल्कि परिवार के साथ बिताए पलों और अपनेपन की यादों से जुड़ी जगह है।
परिवार से जुड़ी हैं उत्तर प्रदेश की जड़ें
श्वेता ने बताया कि उनकी मां लखनऊ से हैं, जबकि उनके पिता हरदोई जिले के संडीला स्थित राम मदरपुर गांव से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता ने लखनऊ में शिक्षक के रूप में काम किया और बाद में आईएएस अधिकारी बने। नौकरी के कारण श्वेता को अलग-अलग शहरों में रहने का मौका मिला, लेकिन उत्तर प्रदेश से उनका रिश्ता हमेशा बना रहा।
नाना के पांच रुपये आज भी याद
लखनऊ की यादों में श्वेता के लिए नाना से मिलने वाले पांच रुपये की खास जगह है। उन्होंने बताया कि बचपन में यह रकम उनके लिए बेहद मायने रखती थी, क्योंकि इससे नाना का प्यार जुड़ा था। उन्हें गोल्डस्पॉट सॉफ्ट ड्रिंक पीना और परिवार के साथ रोवर्स में खाने-पीने जाना भी याद है।
हजरतगंज में स्कूटी से घूमना, चाट-कबाब का स्वाद लेना और दशहरे के मेले में परिवार के साथ जाना भी उनके बचपन की खास यादों में शामिल है। त्योहार के कपड़े पहनना और फिर परिवार के साथ बैठकर खाना खाना जैसे पल आज भी उनके लिए खास हैं।
चिकनकारी और लखनऊ की विरासत से लगाव
श्वेता को लखनऊ की चिकनकारी बेहद पसंद है। उन्होंने बताया कि उनकी अलमारी में चिकनकारी के कई कपड़े हैं, जिन्हें वह अक्सर पहनती हैं। अभिनेता अली फजल के साथ काम करने के दौरान भी उन्हें उनके अपनत्व और मेहमाननवाजी का अनुभव मिला।
श्वेता लखनऊ में ‘मिर्जापुर’ के विभिन्न सीजन के अलावा फिल्म ‘रात अकेली है’ और ‘कंजूस मक्खीचूस’ की शूटिंग कर चुकी हैं। हाल की यात्रा के दौरान उन्होंने पुराने लखनऊ की गलियों, हवेलियों और ऐतिहासिक इमारतों को देखा। वह अमीर-उद-दौला लाइब्रेरी भी पहुंचीं, जहां उन्होंने पुरानी साहित्यिक सामग्री देखी।
अभिनेत्री का मानना है कि इतिहास को जानना और अपनी विरासत को सहेजना जरूरी है। लखनऊ से उनका रिश्ता बचपन की यादों के साथ-साथ यहां की संस्कृति, खानपान और अपनत्व से भी जुड़ा है।



