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गांव, किसान और गरीबों को न भूलें कंपनियां, सीएसआर से ग्रामीण भारत को मजबूत करने पर शिवराज का जोर

महिला समूहों को बाजार से जोड़ने, टिकाऊ खेती अपनाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में उद्योग जगत से भागीदारी की अपील

लेखक: कपिल माखीजा, जनशक्ति उजालास्थान: नई दिल्ली3 मिनट पढ़ें
ग्रामीण विकास और सामाजिक जिम्मेदारी में कॉरपोरेट जगत की भागीदारी पर जोर देते शिवराज सिंह चौहान।
ग्रामीण विकास और सामाजिक जिम्मेदारी में कॉरपोरेट जगत की भागीदारी पर जोर देते शिवराज सिंह चौहान।
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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कॉरपोरेट जगत से सामाजिक जिम्मेदारी को केवल कानूनी औपचारिकता तक सीमित न रखने और गांवों, किसानों तथा वंचित वर्गों के कल्याण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया है। बुधवार को नई दिल्ली में ‘डूइंग गुड फॉर भारत अवॉर्ड्स 2026’ और तीन दिवसीय ‘वन पर्पस इंडिया फोरम’ के समापन समारोह में उन्होंने कहा कि देश के समग्र विकास के लिए उद्योग जगत को ग्रामीण भारत की जरूरतों, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान देना होगा।

समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाएं कंपनियां

समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए चौहान ने भारतीय दर्शन और महात्मा गांधी के ट्रस्टीशिप सिद्धांत का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधन केवल किसी व्यक्ति या संस्था के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए हैं। कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) को उन्होंने दो प्रतिशत राशि खर्च करने की कानूनी बाध्यता से आगे बढ़कर समाज के प्रति जिम्मेदारी और सेवा का माध्यम बताया। उनके मुताबिक, कंपनियों और संपन्न वर्ग को अपनी संपत्ति का उपयोग व्यापक जनकल्याण के लिए भी करना चाहिए।

महिला समूहों की आर्थिक ताकत बढ़ाने पर जोर

ग्रामीण विकास के क्षेत्र में महिला स्व-सहायता समूहों की भूमिका रेखांकित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश में 10 करोड़ महिलाएं इन समूहों से जुड़ी हैं, जिनमें तीन करोड़ ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में बैंकों के माध्यम से इन समूहों को 10 लाख करोड़ रुपये का ऋण लिंकेज उपलब्ध कराया गया है। इनका गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) अनुपात लगभग एक प्रतिशत है।

चौहान ने उद्योगों और परोपकारी संस्थाओं से महिला समूहों को प्रशिक्षण, उत्पादों की पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार तक पहुंच बनाने में सहयोग देने की अपील की। इससे महिलाओं के उत्पादों की गुणवत्ता और बिक्री बढ़ाने के साथ उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिल सकती है।

खेती की सेहत सुधारने के लिए वैज्ञानिक शोध जरूरी

कृषि भूमि की गुणवत्ता पर चिंता जताते हुए चौहान ने रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग को मिट्टी के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह बताया। उन्होंने कहा कि जमीन की उर्वरता बनाए रखने के लिए टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना जरूरी है। वैज्ञानिक अनुसंधान का लाभ प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहे, बल्कि उसे सीधे किसानों तक पहुंचाया जाए। ‘लैब टू लैंड’ की अवधारणा को प्रभावी बनाने पर जोर देते हुए उन्होंने कृषि और स्वास्थ्य के बीच संबंध को भी महत्वपूर्ण बताया।

पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाने की अपील

केंद्रीय मंत्री ने जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ और पूर्वजों की स्मृति में पौधे लगाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन जैसे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है। ग्रामीण भारत की अहमियत बताते हुए उन्होंने कहा कि शहरों की चमक-दमक के बीच गांव, गरीब और खेती को नहीं भुलाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, देश के विकास में ग्रामीण समाज की भूमिका केंद्रीय है।

सरकार, उद्योग और सामाजिक संगठनों के सहयोग पर बल

चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की खाद्य सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर भरोसा जताया। उन्होंने सामुदायिक कल्याण, जल सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक नवाचार के क्षेत्र में योगदान देने वाले पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी। कार्यक्रम में सीएसआरबॉक्स के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी भौमिक शाह, आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर अश्विन महालिंगम और नारायण सेवा संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल सहित कॉरपोरेट, सामाजिक संस्थाओं और परोपकारी क्षेत्र के प्रतिनिधि मौजूद रहे। फोरम का समापन विकसित भारत के निर्माण में जनभागीदारी और संस्थागत सहयोग को मजबूत करने के संकल्प के साथ हुआ।

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