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रूप चौदस पर आज जलेंगे यमराज के नाम के दीप, जानिए छोटी दिवाली का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

नरक चतुर्दशी पर दीपदान और भगवान कृष्ण की पूजा का विधान, सौंदर्य और आरोग्य के लिए किया जाता है अभ्यंग स्नान

लेखक: कपिल माखीजा, जनशक्ति उजालास्थान: धर्म डेस्क2 मिनट पढ़ें
प्रतीकात्मक चित्र।
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दीपावली के उल्लास के बीच आज शनिवार, 7 नवंबर को रूप चौदस और छोटी दिवाली का पर्व श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। इसे नरक चतुर्दशी और काली चौदस के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत, शारीरिक स्वच्छता और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना से जुड़ा है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा, यमराज के नाम दीपदान और अभ्यंग स्नान की विशेष धार्मिक परंपरा है। शाम को घरों के बाहर दीप जलाकर परिवार की मंगलकामना की जाएगी।

आज शाम यम दीपदान का शुभ समय

कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि आज सुबह 10 बजकर 47 मिनट से प्रारंभ हो चुकी है। इसका समापन 8 नवंबर, रविवार को सुबह 11 बजकर 27 मिनट पर होगा। प्रदोषकाल में चतुर्दशी तिथि होने के कारण आज शाम यम दीपदान किया जाएगा। इसके लिए शाम 5 बजकर 31 मिनट से रात 8 बजकर 9 मिनट तक का समय शुभ बताया गया है। इस दौरान घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर सरसों के तेल का चौमुखा दीपक जलाने की परंपरा है।

नरकासुर के वध से जुड़ा है पर्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने इसी तिथि पर अत्याचारी नरकासुर का वध कर उसके बंदीगृह में कैद हजारों महिलाओं को मुक्त कराया था। इस विजय को अन्याय और अत्याचार पर धर्म की जीत के रूप में देखा जाता है। इसी कारण इस दिन को नरक चतुर्दशी कहा जाता है। श्रद्धालु भगवान कृष्ण की पूजा कर सुख, शांति और नकारात्मकता से मुक्ति की कामना करते हैं।

रूप निखारने के लिए अभ्यंग स्नान की परंपरा

रूप चौदस पर तेल मालिश और उबटन लगाकर स्नान करने की परंपरा है। इसे अभ्यंग स्नान कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे शरीर की शुद्धि, आरोग्य और सौंदर्य की प्राप्ति होती है। इस वर्ष चतुर्दशी की उदया तिथि 8 नवंबर को होने के कारण अभ्यंग स्नान का मुहूर्त रविवार सुबह 5 बजकर 41 मिनट से 6 बजकर 38 मिनट तक बताया गया है।

यम दीपदान से जुड़ी है परिवार की मंगलकामना

मान्यता है कि छोटी दिवाली पर यमराज के निमित्त दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार के सदस्यों की लंबी आयु की कामना पूरी होती है। इस दिन दीपदान के साथ हनुमानजी और मां काली की आराधना का भी विशेष महत्व माना गया है। छोटी दिवाली का पर्व दीपावली के मुख्य उत्सव के स्वागत और घर-परिवार में सकारात्मकता का संदेश देता है।

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