धनतेरस पर आज घर-घर होगा लक्ष्मी-कुबेर का पूजन, दीपदान से होगी दीपोत्सव की शुरुआत
धन्वंतरि जयंती के साथ स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना, सोना-चांदी व नए बर्तन खरीदने की परंपरा; जानिए पूजा-विधि और शुभ मुहूर्त

पंचदिवसीय दीपोत्सव का शुभारंभ शुक्रवार को धनतेरस के साथ हो रहा है। कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी पर मनाया जाने वाला यह पर्व धन, आरोग्य और सुख-समृद्धि की कामना का प्रतीक है। इस अवसर पर घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में मां लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना की जाएगी। शाम को दीप प्रज्ज्वलित कर परिवार की खुशहाली और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की जाएगी।
धनतेरस का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है। इसी कारण धनतेरस को धन्वंतरि जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी और धन के अधिपति कुबेर की आराधना का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि उनकी पूजा से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
इंदौर में धनतेरस पर लक्ष्मी-कुबेर पूजन का शुभ समय शाम 6:18 बजे से रात 8:17 बजे तक रहेगा। प्रदोष काल शाम 5:46 बजे से रात 8:20 बजे तक है। इस दौरान घर के मंदिर और पूजा स्थल को स्वच्छ कर दीपक जलाने तथा विधि-विधान से आराधना करने की परंपरा है।
ऐसे करें पूजा-अर्चना
पूजा के लिए चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश, मां लक्ष्मी, भगवान कुबेर और धन्वंतरि की प्रतिमा स्थापित करें। दीपक, धूप, फूल, अक्षत, रोली, फल और मिठाई अर्पित करें। भगवान गणेश के पूजन से शुरुआत कर लक्ष्मी-कुबेर की आरती करें। भगवान धन्वंतरि का स्मरण कर परिवार के उत्तम स्वास्थ्य की कामना करें।
खरीदारी और यम दीपदान की परंपरा
धनतेरस पर सोना, चांदी, आभूषण और नए बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। कई परिवार इस दिन वाहन, घरेलू उपयोग की वस्तुएं और अन्य धातुएं भी खरीदते हैं। वहीं शाम को घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाकर यमराज के निमित्त दीपदान किया जाता है। इसे यम दीपदान कहते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इससे अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और आवश्यक सामग्री का दान करना भी पुण्यकारी माना गया है।



